कालागढ़ में गांव कुआखेड़ा खदरी में बाघ के हमले में एक महिला गंभीर रूप से जख्मी हो गई। प्राथमिक उपचार के बाद महिला को कांशीपुर के लिए रेफर कर दिया गया। पीएचसी प्रभारी डा. जुनैद आलम सिद्दीकी के अनुसार महिला के सिर और हाथ पर बाघ के हमले के गंभीर निशान हैं।
कालागढ़ टाइगर रिजर्व की सीमा से लगे कुआखेड़ा गांव में गन्ने के खेत में गांव की महिला दीपाकौर (32 वर्ष) पति मंगल सिंह के साथ काम कर रही थी। तभी बाघ ने महिला पर हमला कर दिया। शोर की आवाज सुनकर उसके पति ने किसी तरह बाघ को हटाया। इसी बीच मौके पर पहुंचे ग्रामीणों को आते देख बाघ जंगल की ओर भाग गया। परिजन घायल महिला को लेकर कालागढ़ स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। प्रभारी चिकित्साधिकारी ने बताया कि महिला के सिर पर गहरे जख्म हैं। सिर फटा हुआ है। हाथों पर भी बाघ के पंजों के निशान हैं। प्राथमिक चिकित्सा के बाद महिला को उपचार के लिए कांशीपुर रेफर कर दिया गया।
उधर ग्रामीण बंता सिंह, कुलवंत सिंह, मोहन सिंह, मंजीत सिंह आदि ने बताया कि सूचना के काफी देर बाद भी वन विभाग के न तो अधिकारी ही मौके पर पहुंचे और न ही कोई कर्मी ही मौके पर आया। उधर, घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि 15 जनवरी को इसी गांव की छिन्दोबाई बाघ के हमले से बेमौत मारी जा चुकी है। उसका जंगल में अधखाया शव मिला था। राज्य की सीमा पर यह इलाका कार्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ टाइगर रिजर्व की सोना नदी रेंज के निकट स्थित है। वहीं, उत्तर प्रदेश के साहूवाला वनरेंज के निकट है। दोनों ही राज्य अंतरराज्यीय गश्त के नाम पर सुरक्षा का दावा करते हैं, लेकिन वन्यजीवों को ग्रामीण इलाके में आने से रोकने पर कोई अमल नहीं करते है। यहीं कारण है कि 20 दिनों में बाघ का यह दूसरा हमला हो चुका है।