चांदपुर। अखिल भारतीय किसान सभा ने केंद्रीय बजट का पुतला फूंककर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। संगठन ने आरोप लगाया कि बजट ने कृषि क्षेत्र की उपेक्षा की है, जो करोड़ों किसानों की आजीविका का आधार है। पदाधिकारियों ने कहा कि वित्त मंत्री के भाषण में कृषि को लगभग नजरअंदाज किया गया। छोटे व सीमांत किसानों का केवल एक बार जिक्र हुआ जबकि ग्रामीण मजदूरों का नामोनिशान नहीं। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, 2025 में कृषि विकास दर 3.5 प्रतिशत रह गई, जो दशक के औसत 4.45 प्रतिशत से काफी कम है। फसल उत्पादन में भी भारी गिरावट दर्ज हुई। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के लिए 1.40 लाख करोड़ का आवंटन पिछले साल के संशोधित अनुमान से महज 5.3 प्रतिशत ज्यादा है, जो मुद्रास्फीति के बाद वास्तविक वृद्धि शून्य के बराबर है। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग का बजट 10.281 करोड़ से घटाकर 9.967 करोड़ कर दिया गया। नकदी फसलों पर बयानबाजी तो हुई, लेकिन कपास मिशन, दलहन मिशन जैसी योजनाओं का कोई जिक्र नहीं।