बिजनौर। एक वित्तीय वर्ष में बचत खाते में दस लाख रुपये तक जमा करने वालों पर आयकर विभाग की नजरें तिरछी हो गई हैं। विभाग की ओर से वर्ष 2009 से 2014 के बीच किसी भी वित्तीय वर्ष में इतनी राशि वाले खाताधारकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। विभाग की ओर से इस रकम का हिसाब-किताब मांगा जाएगा।
बता दें कि व्यापारियों का खाता करंट अकाउंट में खोला जाता है। बाकी उपभोक्ताओं के खाते सेविंग अकाउंट में खोले जाते हैं। माना जाता है कि किसानों को छोड़कर उपभोक्ता अपने सेविंग अकाउंट में ज्यादा रुपये जमा नहीं करते हैं। ऐसे में एक वित्तीय वर्ष में दस लाख रुपये की बड़ी राशि खाते में जमा होना असामान्य श्रेणी में माना जाता है। किसान न होने के बाद भी कई उपभोक्ताओं के खातों में मोटी रकम जमा होती है। विभाग की ओर से की गई छानबीन में वर्ष 2009 से 2014 तक किसी भी वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपये तक जमा करने वाले उपभोक्ता काफी संख्या में मिले हैं।
विभाग ने ऐसे उपभोक्ताओं को नोटिस भेजे हैं। उपभोक्ताओं से उनके खाते में जमा हुई राशि के स्रोत के बारे में पूछा जाएगा। जरूरत पड़ने पर परिचित और रिश्तेदार की कुंडली भी खंगाली जाएगी। जिला आयकर अधिकारी मुकेश कुमार के मुताबिक इन खातों की जांच चल रही है। ऐसे उपभोक्ताआें से उनकी आय के बारे में पूछा जा रहा है।