बिजनौर में गंगा के तटीय गांवों को गंगा के कटान से जल्दी ही मुक्ति मिल जाएगी। इसके लिए सिंचाई विभाग के 53 करोड़ के प्रस्ताव को तीन समितियों ने मंजूरी दी है। अब यह फाइल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कैंप कार्यालय में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री के साइन होते ही प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल जाएगी और गंगा किनारे तटबंध बनाने का काम शुरू हो जाएगा। तटबंध बनने के बाद गंगा का पानी गांवों में नहीं घुसेगा और खेतों का कटान भी नहीं होगा।
गंगा की धारा के एक ओर उत्तराखंड और दूसरी ओर यूपी के गांव बसे हुए हैं। पहाड़ों पर बारिश का पानी मैदान में आता है। पहले बारिश होने पर पहाड़ों से आया पानी नदी के दोनों ओर फैलता था, लेकिन दो साल पहले उत्तराखंड ने तटीय गांवों में तटबंध बनवा दिए थे। इससे अब सारा पानी बिजनौर की ओर जोर मारता है और कटान करता है। गंगा मिर्जापुर, राजारामपुर, डैबलगढ़, ब्रह्मपुरी, सुक्खापुर, कुंदनपुर, सिमलीकला, मीरापुर कोहर चाहड़वाला आदि दर्जन भर गांवों में कटान करती है। यहां के गांव वाले भी लंबे समय से तटबंध बनाने की मांग करते आ रहे हैं। सिंचाई विभाग खंड अफजलगढ़ के अधिकारियों ने तटीय गांवों को कटान से बचाने को तटबंध बनाने के लिए 53 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजा था।
प्रोजेक्ट को मंजूर होने से पहले उत्तर प्रदेश बाढ़ राज्य नियंत्रण परिषद की तीन समितियों के सामने रखा जाता है। इन तीनों समितियों ने प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। इन तीनों समितियों की हरी झंडी मिलने के बाद अब यह फाइल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कैंप कार्यालय में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर होते ही तटबंध का निर्माण शुरू हो जाएगा।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन आरके शर्मा के अनुसार प्रोजेक्ट को दो कमेटियों ने मंजूरी दे दी है। प्रोजेक्ट के स्वीकृत होने से तटीय क्षेत्रों में कटान से गांव वालों को राहत मिल जाएगी।
गंगा द्वारा कटान का मामला हर चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा रहता है। यहां पर सालों से तटबंध बनवाने की मांग चलती आ रही है। इस मामले को लेकर कुछ दिन पहले ही भाजपा विधायक सुचि चौधरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की थी। उन्होंने तटबंध निर्माण के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी दिया था।