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सेवा शिविरों से सुगम हुई कांवड़ यात्रा

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सेवा शिविरों से सुगम हुई कांवड़ यात्रा
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बिजनौर। कांवड़ सेवा शिविरों के लगने से कांवड़ियों की यात्रा सुगम हो गई है। जगह-जगह शिविर लगने से अब उन्हें आराम करने, खाने पीने की परेशानी नहीं होती। पहले कच्चे और जंगल के रास्ते थे। कांवड़ियों को जंगली जानवर और बदमाशों का डर रहता था। उनकी कोशिश रहती थी कि दिन छिपने से पहले किसी आबादी के पास पहुंच जाएं। अब शहर बढ़े, आबादी बढ़ी और कांवड़ सेवा शिविर लगने शुरू हुए तो यात्रा सरल हो गई।
चांदपुर में रामलीला मैदान में सोशल वेलफेयर क्लब चांदपुर पिछले 50 साल से शिविर लग रहा है। शिविर के अध्यक्ष विवेक कॉलेज के चेयरमैन अमित गोयल बताते हैं कि पिछले सालों में बहुत कुछ बदला। पहले कांवड़ शिविर में पूड़ी, आलू की सब्जी और काशीफल की सब्जी होती थी। यही भंडारे का भोजन था। आज कांवड़ियों को उनकी पसंद का कच्चा खाना खाने के लिए दिया जाता है। वे कहते हैं कि पहले कुछ ही परिवार उनके शिविर से जुडे़ थे। अब नगर का लगभग प्रत्येक हिंदु परिवार जुड़ा है। परिवार घर से कुछ न कुछ तैयार करके लाता है। अपने हाथ से कांवड़ियों को भोजन कराता है।
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कांवड़ यात्रा पर कोराना का कोई असर नहीं
कोरोना के प्रकोप का कांवड़ यात्रा पर कोई असर नहीं है। चांदपुर में रामलीला मैदान में लगे शिविर के अमित गोयल बताते हैं कि इस बार कांवड़िये पिछले साल के मुकाबले ज्यादा हैं। पहले उनके शिविर साढे़ चार हजार कांवड़िये आते थे, लेकिन सोमवार रात उनके शिविर में साढे़ पांच हजार से ज्यादा कांवड़िये रुके हुए थे। इनमें पिछले साल के मुकाबले महिलाओं की संख्या बढ़ी है। शिविर में आने वाले 90 प्रतिशत कांवड़िये ग्रामीण परिवेश के हैं।
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हर साल बढ़ रही कांवड़ियों की संख्या
नांगल सोती में सड़क किनारे शिविर लगाने वाले बिजनौर के कमल मित्तल बताते हैं कि पिछले साल के मुकाबले कांवड़ियों की संख्या बढ़ी है। शेरकोट में पिछले 35 साल से शिविर लगाने वाली समिति के शील चंद रस्तोगी, सतीश चौहान, राम अवतार यादव, मुकेश रस्तोगी, राजवीर गहलोत, राकेश रोहिल्ला आदि ने बताया कि प्रशासन की गाइड लाइन के चलते शिविर नहीं लग पाए। पिछले वर्षों में शिविर में खिचड़ी का वितरण किया जाता था। अब उन्हें चाय बिस्कुट दिए जाने लगे हैं। बिजनौर में रिंग रोड पर शिविर लगाने वाले रजनीश अग्रवाल ने बताया कि हर साल कांवड़ियों की संख्या बढ़ रही है।

नगीना से शिवलिंग के रूप में कावड़ ले जाते शिव भक्त।- फोटो : BIJNOR

कोतवाली देहात से कांवड लेकर गुजरते भोले के भक्त।- फोटो : BIJNOR

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