बिजनौर देश को आजादी दिलाने में स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना बलिदान दिया। जैसे ही 15 अगस्त 1947 को आजादी की खबर बिजनौर पहुंची तो खुशी की लहर दौड़ गई। आजादी के जश्न को खास बनाने के लिए लोगों ने नजीबाबाद के निकट स्थित पत्थरगढ़ के किले में एकत्र होकर ध्वजारोहण किया था। कांग्रेस के तत्कालीन जिला अध्यक्ष चंद्रशेखर गोविल के साथ हजारों लोगों की भीड़ पत्थरगढ़ के किले पर एकत्र हुई। इस दौरान 14 वर्षीय बालिका करुणा महेश्वरी ने ध्वजारोहण किया था।
नजीबाबाद निवासी शादाब जफर बताते हैं कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शफीक अहमद उर्फ पट्टू शाह झंडा लेकर नजीबाबाद से पत्थरगढ़ के किले तक गए थे, उनके पीछे हजारों की तादाद में लोग पहुंचे।
पत्थगढ़ किले पर आयोजित आजादी के जश्न में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जेपी जाखेटिया, शिवचरण दास जाखेटिया, जगत भूषण मुष्टिक, सुक्खन सिंह, मौलाना मोहम्मद अली, जगदीश वैश्य आदि लोग सम्मिलित हुए थे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जगदीश वैश्य की पौत्री अंशिका वैश्य बताती हैं कि इस अवसर पर उनके दादा ने खादी के वस्त्र भी वितरित किए थे।
नूरपुर में शहीद स्थल पर फहराया था तिरंगा
गांव गुनियाखेड़ी के परवीन सिंह और गांव असगरीपुर के रिक्खी सिंह ने 16 अगस्त 1942 को नूरपुर थाने पर तिरंगा लगाने के प्रयास में अपने प्राणों का बलिदान दिया था। जिले के इतिहास के जानकार इं. हेमंत कुमार बताते हैं कि 15 अगस्त 1947 को नूरपुर में शहीद स्थल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने थाना प्रभारी के साथ तिरंगा फहराया था।
15 अगस्त 1947 को गोहावर के नारायण सिंह, किशोरी सिंह, फीना के क्षेत्रपाल सिंह, डॉ. भारत सिंह, ताजपुर के डॉ. राजकुमार, रामोरूपपुर के इंदर सिंह, जाफराबाद कुरई के नौबहार सिंह, झुझैला के चंद्रपाल सिंह और सैकड़ों शहीदों के परिजन तिरंगा फहराने के लिए शहीद स्थल पर पहुंचे थे।