नजीबाबाद - पूर्व सैनिक मनोज कुमार।
- जांबाज सैनिकों ने कारगिल फतह के साथ बढ़ाया देश का मान
फोटो-25एनजेडबी01आर
एजाज अहमद
नजीबाबाद। कारगिल युद्ध पाकिस्तानी सेना के उन नापाक इरादों की याद दिलाता है, जिसमें उसने विश्वासघात कर भारत की सरहद पर कब्जा करने का षड्यंत्र रचा था। यह बात पूर्व सैनिक मनोज कुमार ने कही। कारगिल युद्ध के दौरान मनोज भुज में भारतीय वायु सेना के फाइटर प्लेन टेक्नीशियन पद पर कार्यरत थे।
कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायु सेना में कार्यरत शेरकोट निवासी मनोज कुमार वर्तमान में स्टेट बैंक कोतवाली में कार्यरत हैं। मनोज कुमार के मस्तिष्क में तीन मई 1999 में शुरू हुए कारगिल युद्ध यादें आज भी ताजा हैं। वह बताते है कि ज्यादा ठंडे मौसम में सेना नीचे आ जाती है और मौसम सही होने पर वापसी करती है। पाकिस्तानी सेना ने विश्वासघात के साथ भारतीय सरहद पर कब्जा करने का षड्यंत्र रचा और सुरक्षा चेकपोस्ट पर वापसी करने वाले सैनिकों को मारना शुरू कर दिया।
भारतीय थल और वायु सेना ने सामूहिक मिशन के साथ जान की बाजी लगाकर दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। 26 जुलाई 1999 को कारगिल फतह के साथ जब भारतीय फौज ने चोटी पर तिरंगे लहराए तो सैनिकों के साथ भारतीयों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। कारगिल युद्ध के दौरान सैनिक मनोज स्वयं फाइटर प्लेन में गोला-बारूद भरने का दायित्व निभाते थे। (संवाद)
राष्ट्रप्रेम और पर्यावरण के प्रेरणास्रोत बने मनोज
गांव बशीरपुर निवासी कारगिल सैनिक मनोज कुमार सरहद पर देश की सेवा करने के साथ अब पर्यावरण संतुलन के लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं। नमो फाउंडेशन के माध्यम से स्वयं पौधे रोपते हैं। बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने के साथ उनमें राष्ट्रप्रेम भावना का संचार करने का मिशन चला रहे हैं। समाजसेवी सोच के चलते गुरुकुल आर्ष कन्या विद्यापीठ को कंप्यूटर दान देने वाले पूर्व सैनिक मनोज कुमार योग प्रशिक्षक के रूप में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहे हैं।