नजीबाबाद-कारगिल युद्ध में हाथ गंवाने वाले मो.असद।
- फोटो : रितिक का फाइल फोटो
नजीबाबाद। भारतीय सेना ने पाकिस्तान को उसके घर में घुसकर आतंकवादियों के ठिकानों को तबाह कर एक बार फिर से अदम्य साहस, शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया है। कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लोहा लेते हुए बायां हाथ गंवाने वाले गढ़वाल रेजिमेंट के पूर्व सैनिक मो.असद ने यह बात कही।
पूर्व सैनिक मो. असद ने कहा कि पहलगाम की घटना से पाकिस्तान ने देश को धर्म में बांटने की नापाक कोशिश की। शर्मनाक घटना के दर्द ने समूचे देश को एकजुट रखा। भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ठिकानों को तबाह कर यह साबित कर दिखाया है कि पाकिस्तान द्वारा परोसे जाने वाला आतंकवाद और आतंकी सोच बर्दाश्त नहीं की जाएगी।नजीबाबाद गांव ताहरपुर इस्हाक निवासी कारगिल युद्ध सैनिक मो. असद को भारतीय सेना की कार्यवाही पर गर्व है। मो. असद कहते हैं कि इस कार्रवाई से उन्हें कारगिल युद्ध की याद ताजा हुईं। 18 गढ़वाल रायफल्स में तैनात रहे मोहम्मद असद बताते हैं कि उनकी बटालियन ने कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों से लंबी लड़ाई लड़ी।
एक ऑफिसर सहित उनकी रेजिमेंट के 24 सैनिकों ने कारगिल युद्ध में शहादत दी। 13 जून, 1999 को टोलोलिंग पहाड़ी पर हमले में मोर्टार ने उनका बायां हाथ लहूलुहान कर दिया और उन्हें अपना हाथ गंवाना पड़ा। साल 2000 में मेडिकल के आधार पर मो. असद को रेजिमेंट से सेवानिवृत्ति मिली। राष्ट्र सेवा में हाथ गंवाने वाले मो. असद वर्तमान मेें रहमतनगर चांदपुर चुंगी के निकट मोहल्ला खत्रियान में निवास करते हैं। सरकार की ओर से उन्हें नूरपुर-मुरादाबाद रोड पेट्रोल पंप दिया गया है।