बिजनौर में गंगा बैराज के तटबंध के कटान को रोकने के लिए मिट्टी से भरे कट्टे लगाते मजदूर। सवाद
बिजनौर। अबकी बार बरसात ने बिजनौर के गंगा बैराज को हिला डाला। बैराज का पैमाना गड़बड़ाया, पुल के बैयरिंग खराब हुए और अब तटबंध पर खतरा बना हुआ है। इन तमाम दिक्कतों का समाधान खोजने के लिए आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की राय अहम होगी। जल्द विशेषज्ञों की टीम मुआयना करेगी। इसके लिए औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
साल 1984 में बिजनौर बैराज का निर्माण किया गया। बैराज बनने के बाद मध्य गंगा नहरों को पानी मिला और बिजनौर का मेरठ और मुजफ्फरनगर से सीधा संपर्क जुड़ा था। साथ ही बैराज के आठ किलोमीटर लंबे गाइड बंध (तटबंध) ने जिले के करीब 12 गांव और हजारों हेक्टेयर जमीन को बाढ़ से सुरक्षित किया।
इस बैराज ने केदारघाटी में आपदा के बाद पानी के भयंकर सैलाब को झेला। मगर इस साल की बरसात ने बिजनौर बैराज के लिए समस्या खड़ी कर दी। आठ अगस्त को बिजनौर बैराज पुल के स्लैब हिलने लगे। पुल को ठीक करते हुए यातायात चालू ही किया गया था कि बैराज के तटबंध के कटान होने लगा। इस तटबंध को बचाने के लिए अमला जुटा हुआ है और दिन रात काम चल रहा है। अब बैराज के आस पास गंगा में सिल्ट भी जमा हो गई है, जिसके चलते जलस्तर को मापने वाला बैराज का पैमाना ही गड़बड़ा गया है।
बैराज के पिलर पर जो जलस्तर प्रदर्शित होता है, वह हकीकत से एक मीटर ज्यादा है। यानि कम पानी होने पर भी जलस्तर खतरे के निशान को पार कर रहा है। ऐसे में इन तमाम समस्याओं का हल निकालने के लिए सिंचाई विभाग ने आईआईटी से संपर्क साधा है।