बिजनौर। पति-पत्नी के रिश्तों में बढ़ती दरार शादी टूटने तक पहुंच रही है। मगर शादी टूटने से बचाने के लिए जिला अस्पताल में मनकक्ष की शुरूआत हुई है। जिसमें सायकोलोजिस्ट मरीजों की काउंसलिंग कर रहे हैं। दो सप्ताह में जिला अस्पताल के मन कक्ष में करीब 40 मरीज आए। जिनमें सेे ज्यादातर मरीज पारिवारिक झगड़ों के हैं।
सरकार की ओर से संचालित मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला अस्पताल में मन कक्ष की शुरूआत हुई है। जिसमें काउंसलर मानसिक रोगियों की काउंसलिंग कर रहे हैं। इसके लिए एक क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट आयुषी दीक्षित, साइकियाट्रिक सोशल वर्कर साक्षी सिंह, स्टॉफ नर्स राहुल भार्गव की तैनाती हुई है। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट मरीजों की काउंसलिंग कर आपस के मनमुटाव को खत्म करेंगी। दो सप्ताह में करीब 40 मानसिक रोगी आए हैं। जिनमें से करीब 25 मरीजों में पति-पत्नी में आपसी विवाद का कारण है। जिससे लोग तनाव में जा रहे हैं। पहले चरण में मरीजों की काउंसलिंग की जा रही है। उन्हें सलाह दी जा रही है कि क्या करना है और क्या नहीं।
सप्ताह में एक बार होगी मरीजों की काउंसलिंग
मन कक्ष में मरीजों की पहले चरण में काउंसलिंग करने के बाद उन्हें एक सप्ताह बाद बुलाया जा रहा है। एक सप्ताह तक मरीजों को बताए गए रूटीन को फॉलो करने के लिए कहा जा रहा है। अगर एक सप्ताह बाद मरीज स्थिति में कुछ सुधार बताता है तो काउंसलिंग को आगे ऐसा ही रखा जाएगा। वहीं अगर मरीज कोई परिवर्तन नहीं बताता है तो उसे मनोचिकित्सक के पास रेफर किया जाएगा।
इन तीन दिनों में जिला अस्पताल में हो रही मरीजों की काउंसलिंग
जिला अस्पताल में मानसिक रोगियों की काउंसलिंग मंगलवार, बुधवार और शुक्रवार को जा रही है। जबकि सोमवार, बृहस्पतिवार और शनिवार को काउंसलर सीएचसी, पीएचसी पर काम करेंगे। वहां पर तीन दिन मानसिक रोगियों की काउंसलिंग होगी। अभी शेड्यूल तैयार किया जा रहा है।
मानसिक रोगी मुरादाबाद, बरेली होंगे रेफर
अगर मरीजों पर काउंसलिंग का कोई असर नहीं पड़ता है तो उन्हें मुरादाबाद या बरेली रेफर किया जाएगा। क्योंकि इन दोनों जगह सरकारी सुविधाएं उपलब्ध है। प्राइवेट साइकियाट्रिक चिकित्सक एक घंटे की काउंसलिंग के 1500 से 2500 रुपये तक फीस ले रहे हैं। जिससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ेगा। इसलिए मुरादाबाद और बरेली निशुल्क इलाज होगा।
इन समस्याओं के मन कक्ष में आ रहे मरीज
किशोरावस्था में पढ़ाई का अधिक दबाव होने से बच्चों में समस्याएं बढ़ रही हैं। पारिवारिक विवाद, तनाव, नशे की लत से परेशान, चिंता आदि के मरीज आ रहे हैं। वहीं इनसेे संबंधित मरीजों की जिला अस्पताल के मन कक्ष में काउंसलिंग होगी।
मन कक्ष में इस समय पति-पत्नी के बीच विवादों के ज्यादा मामले आ रहे हैं। अभी जिला अस्पताल में काउंसलिंग की व्यवस्था है। दवाई के लिए उन्हें रेफर किया जाएगा। आयुषी दीक्षित, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट
सरकार की ओर से चलाए जा रहे मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला अस्पताल में यह व्यवस्था शुरू हुई है। मानसिक रोग से संबंधित स्टॉफ कमरा नंबर 29 में बैठकर काम कर रहा है। डॉ. अरुण कुमार पांडेय, सीएमएस