बिजनौर में ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित हड़ताल का शुक्रवार को मिंला जुला असर देखने को मिला।
गुटों में बंटे होने के कारण कर्मचारियों के कुछ गुटों ने हड़ताल का समर्थन करते हुए काम ठप रखा तो कुछ रोज की तरह काम में लगे रहे। बैंकों में हड़ताल का बहुत कम असर देखने को मिला। राज्य कर्मचारी भी हड़ताल के समर्थन में हड़ताल पर रहे, लेकिन विभागों में कर्मचारियों की हड़ताल का ज्यादा असर दिखाई नहीं दिया।
एसबीआई स्टाफ व ग्रामीण बैंकों ने हड़ताल को समर्थन नहीं दिया। हालांकि पीएनबी और ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। क्लेरिकल व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हड़ताल पर रहने से पीएनबी में लेनदेन प्रभावित रहा। बैंक अधिकारियों ने ही कुछ उपभोक्ताओं को छोटे-मोटे भुगतान किए। ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स पर तो ताले लटके रहे। वहीं हड़ताल के समर्थन में उत्तर प्रदेश रोडवेज इंप्लॉयज यूनियन ने बृहस्पतिवार रात 12 बजे से शुक्रवार दिन में 12 बजे तक बसों का संचालन बंद रखा। यूनियन सदस्य वर्कशॉप पर एकत्र हुए और प्रदर्शन किया। 11 बजे तक बसें वर्कशॉप से नहीं निकली। बसों का संचालन न होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बीएसएनएल कर्मचारी भी हड़ताल करते हुए पूरा दिन निगम कार्यालय पर बैठे रहे। अध्यक्ष प्रदीप भटनागर ने कहा कि कर्मचारियों ने को उनका हक मिलना चाहिए।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने भी सोमवार को हड़ताल रखते हुए कलक्ट्रेट में धरना दिया। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर शुक्रवार को ताले लटके रहे। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने कलक्ट्रेट में धरना दिया और मांगों को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। विनोद शर्मा व वेत्रलता शर्मा के निर्देशन में धरना हुआ। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं के हड़ताल पर रहने के कारण केंद्रों पर ताले लटके रहे।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भी केंद्रीय कर्मचारियों की हड़ताल को समर्थन करते हुए हड़ताल रखी। जनपद कार्यालय पर आयोजित हड़ताल सभा में जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह ने कहा कि सातवें वेतन आयोग में कर्मचारियों के साथ अन्याय किया गया है। कर्मचारियों व उच्च अधिकारियों के वेतन में भारी अंतर रखा गया है। गजेंद्र शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों की मांग के विपरीत न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये रखा गया है। संचालन देशराज सिंह ने किया। शूरवीर सिंह, देशराज सिंह, संजय वर्मा, कामेंद्र विश्नोई, जगदीश सिंह आदि मौजूद रहे।
शुक्रवार को उप्र राजकीय नर्सेज संघ के बैनर तले जिला अस्पताल में नर्सों ने हड़ताल कर प्रदर्शन किया। हड़ताल के दौरान जिलाध्यक्ष पेशेंस सिंह ने कहा कि नर्सों का न्यूनतम पेग्रेड 5400 रुपये, भत्ते में बढ़ोतरी, जोखिम भत्ता, अन्य सरकारी कर्मचारियों के समान नर्सों को भी रात्रि कालीन भत्ता, मातृत्व अवकाश के दौरान पूर्ण वेतन मिलना व देशभर में कार्यरत नर्सेज का पद एवं नामांकरण सामान्य रूस से ग्रुप बी में होना चाहिए। जब तक संघ की यह मांगें नहीं मानी जाती है, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल मेें आकस्मिक सेवाओं को हड़ताल से मुक्त रखा गया है। इस अवसर पर पुष्पा निगम, रजनी शर्मा, शकुंतला थॉमस, मैरी थॉमस, पद्मावती, शशि रानी व जसकरन कौर आदि मौजूद रही।
उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ सदस्यों ने भी हड़ताल की। मध्य गंगा नहर निर्माण प्रांगण में हुई बैठक में पश्चिमांचल के उपाध्यक्ष ओपी शर्मा ने कर्मचारी हितों के लिए आर पार की लड़ाई लड़ने की बात कही। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा व संचालन ओमप्रकाश यादव ने किया। हरि सिंह, सुशील कुमार, सीपी सिंह, मनोज कुमार, सत्यपाल सिंह आदि मौजूद रहे। मेरठ डिविजन इंश्योरेंस इंप्लोयेज यूनियन के बैनर तले बीमा क्षेत्र के कर्मचारी भी हड़ताल पर रहे। शाखा सचिव बीमा क्षेत्र, रक्षा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा बढ़ाने के बाद भी वित्तीय संस्थाओं के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों ने हड़ताल की है। । यशपाल सिंह, गजे सिंह, रोहित कुमार, कपिल कुमार आदि रहे। वहीं स्योहारा में श्रमिक संगठनों की देशव्यापी हड़ताल से शुक्रवार को बैंक और टेलिकॉम सेवाएं प्रभावित रहीं।
मांगों को लेकर हुए एकजुट
नजीबाबाद। कत्था मजदूर यूनियन के अध्यक्ष अमर सिंह एवं मंत्री नरेंद्र शर्मा के नेतृत्व में मजदूरों ने फैक्ट्री में हड़ताल कर कामकाज नहीं किया। मजदूरों ने न्यूनतम वेतन कानून में संशोधन करते हुए सबके लिए न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये प्रतिमाह करने, सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने, श्रम कानूनों को सख्ती से लागू करने, रोजगार सृजन के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में तेजपाल, राजेंद्र, धर्मवीर, रोशन, राजकुमार, विपिन, धनेश, बेगराज आदि मजदूर शामिल रहे। नॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन के शाखा सचिव विक्रांत के नेतृत्व में फखरूद्दीन, राकेश वाजपेयी, संतोष अरोड़ा, अंकुर, अनिल, मनोज, बाबूराम, राम सिंह आदि ने सातवें पे कमीशन की अनियमितताओं से असंतुष्ट होकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये करने, पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने, रेलवे में एफडीआई प्रथा को बंद करने की मांग की। उधर, यूपी रोडवेज इंप्लाइज यूनियन के शाखा अध्यक्ष मूलचंद शर्मा के नेतृत्व में हड़ताली रोडवेजकर्मियों ने बसें नहीं चलाईं। जिससे गंतव्यों पर जाने वाले यात्री घंटों परेशान रहे। केंद्रीय आह्वान पर बीएसएनएल कर्मचारी हड़ताल पर रहे। रामकुमार की अध्यक्षता एवं जयानंद के संचालन में हुई मीटिंग में कर्मचारियों ने सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों का विनिवेश व निजीकरण रोकने, मजदूरों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा देने, बीएसएनएल को पुनर्जीवित करने के लिए आर्थिक सहायता देने, न्यूनतम बोनस 7000 रुपये का भुगतान करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में जितेंद्र, प्रमोद, शिवबहादुर, रमेशचंद, नरपाल, भारत, अविनाश आदि शामिल रहे।