बिजनौर। जिले के थानों में भले मानवाधिकार सरंक्षण के बोर्ड लगे हों पर खुद पुलिस ही मानवाधिकार का हनन करने से बाज नहीं आती। हालांकि पुलिस अधिकारी दावा करते हैं कि थानों में मानवाधिकारों का हनन नहीं किया जाता लेकिन लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखना, गैर संघेय अपराधों में हथकड़ी लगाना, हवालात में मारपीट करने की शिकायतें आम हैं। पूर्व में थाने में बेकसूर की अकारण पिटाई करने पर कोतवाल को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। युवक से मारपीट में एक दरोगा को तो हाल ही में निलंबित किया गया है।
थानों में मानवाधिकार अधिकार के उल्लंघन के तमाम मामले सामने आने के बाद थानों में मानवाधिकार सरंक्षण के बोर्ड लगाने की परंपरा शुरू हुई। लेकिन नियम लिखे ही रह जाते हैं और इन पर अमल नहीं होता। पुलिस आए दिन लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में रखती हैं। हथकड़ी लगाकर कोर्ट में पेशी के लिए ले जाया जाता है। आए दिन पुलिस के दुर्व्यवहार की शिकायत सामने आती रहती हैं। ऐसी शिकायतों को जांच के नाम पर या तो दबा दिया जाता है या किसी मामले के तूल पकड़ने पर कार्रवाई होती है। दुष्कर्म, मारपीट, लूट जैसी घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज करने पर भी पुलिस पीड़ित को टरका देती है ताकि थाने का रिकार्ड साफ रहे। लेकिन कई बार उच्चाधिकारियों के दबाव के बाद अथवा कोर्ट के निर्देश के बाद ही रिपोर्ट दर्ज की जाती है।
एक साल पहले धामपुर थाने में हत्या के एक मामले में युवक को थाने में रखकर जमकर पीटा गया और यातनाएं दी गई। युवक का कोई कसूर नहीं था। शिकायत होने पर मामले की जांच कराई गई। जांच के बाद तत्कालीन कोतवाल मनोज कुमार को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी।
नगीना देहात थाने में तैनात दरोगा अरविंद शर्मा ने एक युवक को पांच दिन पहले बेवजह पीटा। उसके साथ बदसलूकी की गई। इसकी जांच एसपी देहात से कराई गई। जांच में आरोप सही पाए जाने पर दरोगा को निलंबित किया गया। ये तो कुछ बानगी है थानों में दुर्व्यवहार की। आम जनता को जो दुर्व्यवहार झेलना पड़ता है वह न तो अधिकारियों तक पहुंचता है और न मीडिया तक।
घरेलू हिंसा की आती है सबसे ज्यादा शिकायत
पुलिस कार्यालय में खुले मानवाधिकार सेल में जनवरी माह से अब तक करीब 200 शिकायतें आई हैं। इनमें दस को छोड़कर सभी शिकायतें निपटा दी गई हैं। सेल में 70 प्रतिशत शिकायत घरेलू हिंसा की आती हैं। कोई महिला दहेज मांगने तो कोई पीटने की शिकायत करती है। पुलिस के बदसलूकी करने की भी इक्का-दुक्का शिकायत आ रही है। जमीन के विवाद की शिकायत लेकर भी लोग पहुंचने लगे है। शिकायत करने के बाद सब मामलों में समझौते हो जाते हैं।
एसपी डा. धर्मवीर सिंह के मुताबिक जिले में मानवाधिकार के सभी नियमों का पूरी तरह पालन हो रहा है। थानों में ये नियम पूरी तरह लागू हो रहे हैं।