शराब ठेका हटाने की मांग को लेकर महिलाओं ने किया हंगामा।
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बिजनौर में जिले में कच्ची शराब बनाने का काम कुटीर उद्योग का रूप धारण करता जा रहा है। खादर का बीहड़ क्षेत्र कच्ची शराब बनाने के लिए वरदान बना हुआ है। अभियान चलाने के बावजूद शराब माफिया कच्ची शराब बेचने से बाज नहीं आ रहे हैं। इन माफियाओं के खिलाफ अब जिले भर के कई गांवों में महिलाओं ने आवाज उठाई है।
कच्ची शराब की बिक्री चोरी-छिपे पूरे जिले में हो रही है। यहां तक कि दूसरे राज्यों को भी जिले से कच्ची शराब भेजी जा रही है। सस्ती होने के कारण गरीब परिवारों के लोगों को इसे पीने की लत लगती जा रही है। परिवार की कमाई शराब में जाते देख औरतों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है। धामपुर क्षेत्र में मीरापुर, सीरवासुचंद्र, मानियावाला, आलमपुर गांवड़ी, भिक्कावाला, बनियोवाला, शाहनगर, रामनगर गोंसाई, शिवालाकलां क्षेत्र में शहबाजपुर, शिवालाकलां, मंझौला गुर्जर आदि में महिलाएं आए दिन शराब और शराब माफियाओं के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रही हैं। ठेकों के आसपास के परिवारों का रहना दूभर हो गया है। ऐसा नहीं है कि आबकारी विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। बीते करीब एक माह में विभाग के अभियान में तीन हजार 678 लीटर कच्ची शराब पकड़ी गई है। 17 हजार 800 लीटर लाहन नष्ट किया है और 16 लोगों को जेल भेजा है। विभागीय कार्रवाई के बाद माफिया एक-दो दिन के लिए ही शांत होते हैं और फिर से अपने धंधे में लग जाते हैं। कच्ची शराब के अवैध कारोबार में महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस द्वारा अब तक कई महिलाओं को पकड़ा जा चुका है।
mखादर क्षेत्र में खूब फल फूल रहा ः कच्ची शराब का धंधा खादर क्षेत्र में खूब फल फूलता है। यहां पर पानी की कमी नहीं होती। बीहड़ क्षेत्र होने के कारण पुलिस भी वहां जाने से बचती है। अगर पुलिस आ भी जाए तो माफियाओं को पता चल जाता है और वे दूसरे रास्ते से चंपत हो जाते हैं। जिला आबकारी अधिकारी जनार्दन यादव के मुताबिक कच्ची शराब के खिलाफ जिले में अभियान चलाया जा रहा है। जहां भी कच्ची शराब की जानकारी मिलती है, विभागीय टीम वहां छापा मारती है। जो भी इस धंधे में लिप्त है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।