बिजनौर जिले में बैंकों में छुट्टियों के बावजूद दूसरे दिन भी एटीएम कैशलेस ही मिलीं। लोग यही दुआ करते हुए एटीएम तक पहुंचते रहे कि काश इसमें कैश मिल जाए। मगर अधिकतर को कैश न मिलने पर मायूस ही लौटना पड़ा।
जिला मुख्यालय पर करीब 30 एटीएम में से किसी पर भी कैश नहीं था। एचडीएफसी, एसबीआई आदि के कुछ बैंकों की एटीएम तो खुली रहीं। लेकिन इनसे कैश नहीं मिल पाया। मंडावर में पीएनबी और एसबीआई की एटीएम के आसपास ग्राहक इधर-उधर भटकते रहे। रामपाल सिंह ने बताया कि उनको किसी ने फोन करके एटीएम में कैश रखे जाने के बारे में बताया था। वे तुरंत ही यहां आ गए, लेकिन कुछ नहीं मिला। नदीम की एटीएम के पास ही दुकान है। एटीएम के पास चहल-पहल देखकर वह भी मौके पर आ गया। उसने बताया कि एटीएम से पहले इक्का-दुक्का लोग ही कैश निकालने आते थे। मगर अब कतार नहीं टूटती और कैश नहीं मिलता। स्पेयर पार्ट्स की दुकान चलाने वाले रामेंद्र सिंह के मुताबिक वे सुबह से चार बार एटीएम के पास चक्कर काट चुके हैं। लेकिन नगदी नहीं मिल पाई। पंकज कुमार के मुताबिक छुट्टियों के हिसाब से एटीएम में पैसे होने चाहिए, जिससे नियमित रूप से नगदी मिलती तो बैंकों का भी बोझ कम हो जाता।
उधर, नगीना में नोटबंदी के बाद भुगतान न मिलने पर बैंकों से निराश खाली हाथ लौट रहे आम लोगों को एटीएम से भी कोई राहत नहीं मिल पा रही है। बैंक बंदी के दिन शनिवार की तरह रविवार को भी नगीना में स्थित करीब एक दर्जन बैंक शाखाओं के एटीएम पूरी तरह बंद रहने से आम लोगों को बेहद कठिनाई का सामना करना पड़ा। बच्चों के मनोरंजन के लिए स्थानीय एमएम इंटर कॉलेज के खेल मैदान में चल रहे राममनोहर लोहिया मेले में भी नोटबंदी का असर साफ नजर आ रहा है। मेले के ठेकेदार राशिद कुरैशी का कहना है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार मेले में आधे से भी कम ग्राहक आ रहे हैं। मेले में दुकान लगाये बैठे दुकानदार और झूले वाले हाथ पर हाथ धरे बैठे है। नगर के बाजार में भी रौनक पूरी तरह गायब दिखाई दे रही है। मोबाइल, इलेक्ट्रानिक और फर्नीचर के शोरूमों पर भी नोटबंदी का पूरा असर है।
व्यापारी यासीन सोनी, शेख मौ. राशिद, शेख शददन, आसिफ इस्लाम, हर्ष गोयल, शेखर कपूर, नीरज गुप्ता का कहना है कि वह रविवार को नगर की कई बैंक शाखाओं, सिंडिकेट बैंक, केनरा बैंक, एक्सिस बैंक, बैंक आफ इंडिया आदि के एटीएम पर रुपये निकालने पहुंचे लेकिन सभी एटीएम बंद मिले।