बिजनौर। हेपेटाइटिस बी और सी लाइलाज बीमारी नहीं है। इसका जिले में भी इलाज संभव है। हेपेटाइटिस होने का मतलब लीवर का प्रभावित होना है। शराब के ज्यादा सेवन से लीवर प्रभावित हो रहा है। आज के समय में हेपेटाइटिस का इलाज टेबलेट के माध्यम से किया जा रहा है। ये बात पत्रकारों से प्रेसवार्ता करते हुए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अमित अग्रवाल ने बताई।
रविवार को डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि इस बार विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर डब्ल्यूएचओ की ओर से ‘आई केन नॉट वेट’ थीम रखी रखी गई है। हेपेटाइटिस लीवर की सूजन है। हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई वायरस होने से लीवर प्रभावित होता है। हेपेटाइटिस ए वायरस एक-दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है। हेपेटाइटिस बी वायरस संक्रमित खून, वीर्य और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैल रहा है। इसके साथ ही हेपेटाइटिस सी वायरस संक्रमित खून के संपर्क में आने से फैलता है। वहीं, हेपेटाइटिस डी और ई आमतौर पर हेपेटाइटिस बी वाले लोगों में होता है। हेपेटाइटिस ई वायरस ज्यादातर दूषित पानी से फैलता है। इसके साथ ही डॉ. अमित अग्रवाल ने कहा कि अगर भूख नहीं लगती, थकान, पीलिया आदि के लक्षण दिखाई देने पर जांच करानी चाहिए। इसके साथ ही शराब के ज्यादा सेवन से हेपेटाइटिस की बीमारी बढ़ रही है।