बिजनौर के धामपुर में भारतीय कंप्यूटर साक्षरता प्रोग्राम एवं ज्ञान भारती की ओर से आयोजित ‘स्पर्श’ नाटक का मंचन दर्शकों के दिलों को छू गया। कलाकारों ने संजीदा अभिनय करते हुए दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ ही उन्हें सामाजिक मुद्दों के प्रति गंभीर रहने का संदेश दिया। एक कुष्ठ आश्रम के परिवार के माध्यम से कलाकारों ने समाज के स्वार्थी चेहरों की पोल भी खोली।
शनिवार देर रात शुभम मंडप में हुए नाटक में दिल्ली से आई रंगकर्मियों की टीम ने इस नाटक का मंचन किया। यह नाटक कुष्ट आश्रम में रहने वाले परिवार की कहानी पर आधारित रहा। इसमें पात्र का एक पुत्र पारस है। उसे कुष्ट रोग नहीं है लेकिन उसे यह रोग न हो जाए, इसलिए सब परिजन उसे स्पर्श नहीं करते हैं।
मंचन में दिखाया गया है कि समाज के लोग स्वार्थ के लिए किस तरह उनकी मदद करना चाहते हैं। एक नेता वोट की खातिर, फादर धर्मं परिवर्तन करने की शर्त पर उनके बेटे को पढ़ाने तक को कहने लगते हैं। इसे सुनकर सभी कुष्ट आश्रम में रहने वाले स्तब्ध रह जाते हैं। नाटक में पात्रों ने समाज के स्वार्थी चेहरों को बेनकाब कर के एक संदेश दिया स्वार्थ रहित सेवा ही श्रेष्ठ है।
नाटक में पारस की भूमिका में चेतन, देव की भूमिका में अक्षम चौधरी, दीनानाथ की भूमिका में शानू खान, संत की भूमिका में धारण चौहान, साहिल की भूमिका में अनूप, फादर की भूमिका में सौरभ, उर्मी की भूमिका में निकिता, नेता की भूमिका में लखन सिंह, मिस लेले की भूमिका में विन्नी गुलाटी शामिल रहे। इस अवसर पर सोना रानी सरस्वती वंदना पर नृत्य कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। दर्शकों ने कलाकारों की इस प्रस्तुति की जमकर सराहना की। इस नाटक में जानकी प्रसाद, पवन संगम, दिनेश चंद नवीन, राजेश कुमार, जयगोपाल सक्सेना, सत्यराज, पंकज लोचन, शिवेंद्र अग्रवाल, राजेश समेत अन्य मौजूद रहे।