बिजनौर में एचआईवी ग्रसित तीन महिलाएं गर्भवती हैं। स्वास्थ्य विभाग इन बच्चों को स्वस्थ रखने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। महिलाओं के स्वास्थ्य की पूरी देखभाल की जा रही है। ऐसी महिलाओं से जन्म लेने वाले बच्चों के पूर्ण स्वस्थ रहने तथा एचआईवी ग्रसित न होने की संभावना 75 प्रतिशत तक रहती है।
एचआईवी की रोकथाम के लिए शासन द्वारा अनेक तरह के जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। जो पुरुष या महिला एचआईवी ग्रसित हो जाते हैं, उनका इलाज भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जाता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस समय जिले में तीन महिलाएं ऐसी हैं जो गर्भवती हैं और एचआईवी से ग्रसित भी। एचआईवी ग्रसित महिलाओं के बच्चे को भी एचआईवी होने की संभावना रहती है, लेकिन अगर उचित इलाज व देखभाल की जाए तो इन बच्चों के पूरी तरह स्वस्थ रहने की संभावना 75 प्रतिशत होती है।
इन महिलाओं का पता चलने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी चौकन्ना हो गया है। इन महिलाओं के उपचार में स्वास्थ्य विभाग कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। डीटीओ व एड्स के नोडल अधिकारी डा.राजकुमार की देखरेख में इन महिलाओं का उपचार किया जा रहा है। डा. राजकुमार ने बताया कि एचआईवी से ग्रसित मरीजों का पूरी जिंदगी इलाज चलता है। पिछले वित्तीय में एचआईपी ग्रसित 11 महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया था, इनमें से चार बच्चे एचआईवी ग्रसित है। इनका इलाज किया जा रहा है।
कैसे होता है एचआईवी
-पुरूष या महिला द्वारा एचआईवी ग्रसित के साथ असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने से।
-एचआईवी ग्रसित की सुई, ब्लेड लगने से।
-एचआईवी ग्रसित मां से बच्चों को।
-एचआईवी ब्लड चढ़ाने से।
उपचार
-एचआईवी से ग्रसित गर्भवती महिलाओं के बच्चे को जन्म के 72 घंटो के भीतर दवा दी जाती है।
-बच्चें के 18 माह के होने के बाद एचआईवी का टेस्ट कराया जाता है।
-बच्चें की प्रतिरोधक क्षमता अन्य बच्चों से कम होने पर एचआईवी का इलाज कराया जाता है।
-बच्चों को एंटी रिट्रो वायरल थिरैपी द्वारा किया जाता है इलाज।