स्वास्थ्य विभाग हुआ सतर्क, संसाधनों की समीक्षा शुरू
बिजनौर। जिले में चौथी लहर ने दस्तक दे दी है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। जिला अस्पताल में मौजूद संसाधनों को चलाकर समीक्षा की जा रही है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में ऑक्सीजन की वजह से लोगों को काफी परेशानी हुई थी, लेकिन अब जिले में चार ऑक्सीजन प्लांट हैं। इसके साथ ही जिला अस्पताल में कोरोना के मरीजों के लिए 102 की बेड की व्यवस्था भी है। संसाधनों की बात करें तो इसे पर्याप्त माना जा रहा है, लेकिन इन संसाधनों को संभालने वाले स्टाफ की कमी का समाधान आज तक नहीं किया जा सका है।
कोरोना काल में लोगों को अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड की किल्लत का सामना करना पड़ा था। कोरोना की दूसरी लहर के बाद जिला अस्पताल में एक हजार लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन करने का ऑक्सीजन प्लांट लग गया। वहीं संयुक्त जिला अस्पताल के महिला अस्पताल में 500 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन करने वाला प्लांट लगा हुआ है। जिला अस्पताल में अब ऑक्सीजन की कोई दिक्कत नहीं है। ऑक्सीजन मरीज के बेड तक सीधे प्लांट से पहुंच रही है। इसके साथ ही धामपुर में 750 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन का उत्पादन करने वाला प्लांट है। वहीं स्योहारा में 300 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन करने वाला प्लांट है।
सप्ताह में दो बार चलाकर चेक करते हैं ऑक्सीजन प्लांट
जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के लिए अलग-अलग ऑक्सीजन प्लांट हैं। ऑक्सीजन की कोई दिक्कत न हो, इसलिए इन्हें सप्ताह में एक से दो बार चलाकर देखा जाता है। ताकि समय आने पर ऑक्सीजन प्लांट में कोई खराबी न आ जाए। ऑक्सीजन प्लांट सहित सभी संसाधनों को समय-समय पर चलाकर देखा जा रहा है।
सीएचसी-पीएचसी पर 30-30 बेड की व्यवस्था
जिले में 11 सीएचसी और 11 पीएचसी हैं, जिनमें 30-30 बेड की व्यवस्था है। इसके साथ ही जिन सीएचसी और पीएचसी पर ऑक्सीजन प्लांट नहीं हैं, वहां काफी संख्या में ऑक्सीजन सिलिंडर रखे हुए हैं। साथ ही प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी पर करीब 20-20 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर लगे हुए हैं, जो जरूरत पड़ने पर मरीज को तुरंत ऑक्सीजन उपलब्ध कराते हैं।
वेंटिलेटर चलाने के लिए नहीं कोई डॉक्टर
जिला अस्पताल में 17 वेंटिलेटर हैं। बच्चों वाले वेंटिलेटर को बाल रोग विशेषज्ञ और बड़े मरीज के वेंटिलेटर को एनेस्थेटिक चलाते हैं, लेकिन ये दोनों ही पद जिला अस्पताल में खाली पड़े हैं। इन डॉक्टरों की जगह वेंटिलेटर चलाने के लिए पांच पीकू टेक्नीशियन और 12 कोविड स्टाफ नर्स हैं।
अस्पताल में हो रही संसाधनों की समीक्षा : सीएमएस
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि कोरोना से निपटने के लिए जिला अस्पताल में सभी संसाधन मौजूद हैं। मरीजों को आसानी से इलाज मिलेगा। मरीज को किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी। जिला अस्पताल में मौजूद संसाधनों की समीक्षा की जा रही है। चिकित्सकों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के खाली पदों को भरने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
चौथी लहर से पहले पूरी व्यवस्था : एसीएमओ
एसीएमओ डॉ. पीआर नायर ने बताया कि जिले में सभी सीएचसी और पीएचसी पर ऑक्सीजन और बेड की व्यवस्था है। पूरे स्टाफ को चौथी लहर के संकेत के बाद अलर्ट कर दिया गया है।