बिजनौर। सहकारी समितियों के चुनाव का प्रक्रिया 11 मार्च अर्थात आज से शुरु। चुनाव में संचालक पदों के आरक्षित सीटों में से आधी पर महिलाओं का कब्जा होगा। हालांकि राजनीतिक दल सहकारिता चुनाव में सीधे तौर पर अपना प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारते हैं। राजनीतिक दलों के लिए सहकारी समितियों का चुनाव अहम है।
सहकारी समितियों के चुनाव की प्रक्रिया 11 मार्च शनिवार से शुरू है। चुनाव में आरक्षण व्यवस्था का ऐलान हो गया। 98 सहकारी समितियों के लिए 882 संचालक अर्थात डायरेक्टर चुने जाने है। इनमें 392 पद विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षित रहेंगे। आरक्षित पदों में से आधे पदों पर महिलाओं का कब्जा होगा। इसलिए कुछ महिलाएं सभापति व उपसभापति सभापति के चुनाव में उतरने का लक्ष्य बनाकर संचालक के चुनाव मैदान में आ रही है।
ये होगा संचालकों का आरक्षण
सहकारी समितियों के चुनाव का आरक्षण घोषित हो गया है। हर समिति में नौ संचालक चुने जाने है। 98 सहकारी समितियों में चुनाव है। इनमें 882 संचालक चुने जाएंगे। हर समिति में चार संचालक पद आरक्षित होंगे। सहकारिता विभाग के अनुसार पहला पद अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होगा। दूसरा पद अन्य पिछड़ा वर्ग अर्थात ओबीसी के लिए आरक्षित होगा। इसके बाद दो पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। दोनों पदों पर किसी भी वर्ग की महिला चुनाव मैदान में आ सकती है। इस प्रकार संचालक के 882 पदों में से 392 पद आरक्षित होंगे। आरक्षित पदों में से 196 संचालक पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
सभापति पद पर नहीं है आरक्षण व्यवस्था
सहकारी विभाग के अनुसार आरक्षण केवल संचालक पदों पर लागू है। सभापति व उपसभापति पद पर कोई आरक्षण व्यवस्था लागू नहीं है। सभापति व उपसभापति का चुनाव में किसी भी वर्ग का दावेदार हो सकता है।
आज से शुरू हैं चुनाव प्रक्रिया
जिले की 98 सहकारी समितियों में संचालक पदों के चुनाव की प्रक्रिया 11 मार्च अर्थात आज से शुरू हैं। 11 मार्च को हर समिति ने अनंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होगा। 12 मार्च को अनंतिम मतदाता सूची पर आपत्तियां ली जाएगी। 13 मार्च को आपत्तियों का निस्तारण होगा तथा इसके बाद अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होगा। 14 मार्च को संचालक पदों के लिए नामांकन होगा। 18 मार्च को मतदान होगा।