जिले में नरभक्षी गुलदार का आतंक किस कदर है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले सात माह में जिले में 13 लोगों की जान गुलदार के हमले में चली गई। 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इनमें से चार मौत 17 जुलाई से अब तक ही हुई हैं। शासन ने कोतवाली देहात-नगीना और रेहड़ क्षेत्र में दो गुलदारों को नरभक्षी भी घोषित कर दिया।
तमाम मशक्कत के बाद सोमवार रात रेहड़ क्षेत्र के गांव सादकपुर में एक गुलदार पिंजरे में फंस गया। भीड़ को देख पिंजरे में छटपटाते हुए गुलदार ने खुद को घायल भी कर लिया। केहरीपुर ले जाकर वन विशेषज्ञों ने उसका परीक्षण और उपचार किया। हालांकि तमाम जांच पड़ताल के बावजूद यह स्थिति साफ नहीं हुई कि रेहड़ क्षेत्र में जो मौत हुई, उसमें वह शामिल था या नहीं।
भट्टपुरा में 30 जुलाई को युवती की गुलदार के हमले में मौत हुई थी, वह क्षेत्र यहां से नजदीक होने के चलते इसी गुलदार द्वारा हमला करने की आशंका जरूर जताई गई। उसे जंगल में छोड़कर उसके हमलावर होने की आशंका भी जताई गई।
मुख्य वन संरक्षक विजय सिंह ने बताया कि गुलदार पिंजरे में घायल हो चुका था। उसे टीम ने कानपुर चिड़ियाघर भेजने का फैसला लिया है। अब वह गुलदार जिंदगीभर वहीं रहेगा, क्योंकि उसे जंगल में छोड़ने से मानव के लिए खतरा हो सकता है। इस वर्ष 23 जनवरी से अब तक 11 गुलदार पिंजरे में फंस चुके हैं। हालांकि गुलदारों के पकड़े जाने का सिलसिला मार्च तक तेजी से चला, लेकिन इसके पांच माह तक कोई गुलदार पिंजरे में नहीं फंसा। अब सोमवार की रात 11वां गुलदार सादकपुर में पिंजरे में फंस पाया है।
अमानगढ़ में एक साल में छोड़े गए 15 गुलदार
जिले की अमानगढ़ वन रेंज 9500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फैली हुई है। एक दशक पहले तक यहां 12 से 14 के बीच बाघ होते थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 27 से भी ज्यादा होने का अनुमान है। ऐसे में बाघों की संख्या बढ़ी तो गुलदार आबादी के बीच जंगलों में रहने लगे। गुलदार को लेकर अमानगढ़ में भी बोझ बढ़ गया है।
वन विभाग की मानें तो बिजनौर में पकड़े गए गुलदारों के अलावा अमरोहा व आसपास के जनपदों से भी गुलदार पकड़कर अमानगढ़ में छोड़े गए। पिछले एक साल में अमानगढ़ में छोड़े जाने वाले गुलदारों की संख्या 15 हो चुकी है। वन विभाग ने अब अमानगढ़ के जंगल में किसी भी गुलदार के छोड़ने पर रोक लगा दी है।