बिजनौर। अभी दस ही दिन बीते हैं कि गुलदार ने कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर एक और इंसान की जान ले ली। यह दूसरी या तीसरी मौत नहीं थी, बल्कि इस साल में यह गुलदार के हमने में जाने वाली 11वीं जान है। इससे पहले दस इंसानों को अगल-अलग जगहों पर गुलदार मार चुका है। कमाल यह है कि यह किसी एक गुलदार ने नहीं किया, बल्कि हर बार अलग जगह, अलग गुलदार रहा। यही कारण वन अफसरों के लिए सिर दर्द बन गया। इस समय इतने गुलदार जंगलों में घूम रहे हैं कि यह पता लगाना ही सबसे बड़ी चुनौती है कि हमलावर कौन सा गुलदार है।
यूं तो वन विभाग के अफसर हर इंसान की मौत पर गश्त करने, ड्रोन उड़ाने, ट्रैप कैमरे लगाने का काम करते हैं। कानपुर से लेकर लखनऊ, दिल्ली तक से विशेषज्ञों की टीम गुलदार को तलाशने पहुंचती है। ट्रैंक्यूलाइज टीम तक ने कई-कई दिन तक जिले में डेरा डाले रखा, लेकिन गुलदार के आगे यह सारी व्यवस्थाएं बौनी साबित होती नजर आ रही हैं। ऐसा नहीं है कि गुलदार पिंजरे में फंसे नहीं, बल्कि अप्रैल माह तक इस साल छह से ज्यादा गुलदार को वन विभाग पकड़ चुका है, लेकिन इसके बाद मानों गुलदार पिंजरे को पहचाने लगे हों। एक के बाद एक इंसानों पर हमले हुए, एक-एक करके इस साल 11 इंसानों की जान गुलदारों के हमले में चली गई। पिछले तीन माह से एक भी गुलदार वन विभाग के हाथ नहीं लगा।
अमानगढ़, नगीना रेंज में सबसे ज्यादा हमले
यूं तो पूरे जिले में ही गुलदार घूम रहे हैं, लेकिन अमानगढ़ और नगीना रेंज में ही सबसे ज्यादा हमले हुए। लगभग सारी मौत इन दोनों ही रेंज में आने वाले गांव के लोगों की हुई। इसका बड़ा कारण यह है कि इन दोनों रेंज के आसपास रिजर्व फॉरेस्ट भी हैं। वहां से निकले गुलदारों ने इन क्षेत्रों के जंगलों में शरण ले रखी है।
अकेले निकले तो मार देगा गुलदार
गुलदार लगातार ऐसे लोगों को शिकार बना रहे हैं जो जंगल में अकेले जा रहे हैं। हर मौत में देखा गया हे कि व्यक्ति अकेले ही जंगल में गए थे। या तो वह बैठे हुए थे या फिर झुके हुए थे। वन विशेषज्ञों की मानें तो झुके हुए या बैठे हुए इंसान को गुलदार छोटा जानवर समझकर हमला कर देता है।
ग्रामीणों के लिए एडवाइजरी जारी
क्या करें
- खेतों में दाे या उससे अधिक के समूह में जाएं
- गन्ना काटने से पहले वन्य जीव भगाने के लिए हांका करें
- खेत में मोबाइल या रेडियो पर तेज आवाज में गाने चलाएं
- काम करते समय एक व्यक्ति को निगरानी के लिए लगाएं
- खेतों में काम करते समय सिर पर हेलमेट या नकपैड पहनें
- अधिक रात में खेतों पर न जाएं, खेतों की निगरानी मचान से करें
- वन्य जीव दिखने पर वन अधिकारियों को तुरंत सूचना दें
यह न करने की दी गई सलाह
- खेतों पर अकेले न जाएं, छोटे बच्चों को अकेले न भेजें
- गन्ने की कटाई बैठकर या झुककर न करें
- खेतों की रखवाली करते समय भूमि या चारपाई पर न सोएं
- वन्य जीव दिखने पर उसे न छेड़े और उसके रास्ते में न आएं
आंकड़ों पर एक नजर
- 10 गुलदार 23 जनवरी से अब तक पकडे़ जा चुके हैं
- 06 पिंजरे वन विभाग ने नगीना और रेहड़ क्षेत्र में लगाए
- 22 गांवों को वन विभाग ने संवेदनशील घोषित किया
- 40 सदस्यों की टीमें कर रहीं गुलदार की खेतों में तलाश
- 01 ड्रोन कैमरे से खंगाली जा रही गुलदार की लोकेशन
कब-कब गई गुलदार के हमने में जान
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- 17 फरवरी 23 को नगीना के गांव किरतपुर में किशोरी अदिति को मारा
- 4 मार्च 23 नहटौर के गांव बल्लाशेरपुर में मासूम पूर्वी को मारा
- 18 मार्च 23 नगीना के गांव काजीवाला में मिथिलेश को मारा
- 19 अप्रैल 23 को अफजलगढ़ के गांव सीरवासचंद में तुंगल सैनी को मारा
- 23 अप्रैल 23 की रात रेहड़ के गांव उदयपुर चांदपुर में मासूम अर्शी को घर से उठाकर मार डाला
- 25 अप्रैल रेहड़ के गांव मूसापुर में खुशी छह वर्ष को ले गया और मार डाला
- 26 अप्रैल सुबह घूमने निकले युवक राहुल को मारा
- 21 जून को अफजलगढ़ के गांव मोहम्मदपुर राजौरी निवासी कमलेश देवी को उत्तराखंड की सीमा में मारा
- 22 जून रेहड़ के गांव मच्छमार में गुलदार ने हमला कर दस वर्षीय बच्चे को मारा
- 17 जुलाई को कोतवाली देहात गांव मखवाड़ा में महिला गुड्डी को मारा
- 27 जुलाई को गांव तेलीपुरा में युवक 18 वर्षीय संदीप को मार डाला
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