बिजनौर। बसपा शासनकाल में बिकी शुगर मिलों की जांच में बिजनौर की शुगर मिल भी आ गई हैं। बिजनौर में भी 2010-11 में दो शुगर मिल बेची गई थीं। इन शुगर मिलों की बिक्री संबंधी कागजात शासन ने तलब कर लिए हैं। शासन द्वारा कागजात तलब करने से मिल से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
बसपा सरकार में सहकारी क्षेत्र की सात शुगर मिलों को कौड़ियों के दाम बेच दिया गया था। जिले की बिजनौर और चांदपुर शुगर मिल भी बेच दी गई थी। उस समय शुगर मिलों को बेचने का काफी विरोध हुआ था, लेकिन सरकार की तानाशाही के आगे किसी की एक नहीं चली थी। बिजनौर की दोनों शुगर मिल पौंटी चड्ढा ग्रुप की वेब इंडस्ट्रीज ने खरीदी थी। बिजनौर शुगर मिल केवल 50 करोड़ 60 लाख और चांदपुर मिल केवल 25 करोड़ 85 लाख रुपये में बेच दी गई थी।
जबकि उस समय मिलों की मशीनरी, चीनी आदि का मूल्य ही इस कीमत से ज्यादा था। बिजनौर की मिल 40 एकड़ (200 बीघा), चांदपुर शुगर मिल 81 एकड़ (405 बीघा) में बनी थी। लेकिन वेब इंडस्ट्री को फायदा पहुंचाने के लिए इतना सब माल कौड़ियों के दाम में बेच दिया गया था। ग्रुप वाले मिल को बंद कर यहां की बेशकीमती जमीन पर कॉलोनी काटना चाहते थे। लेकिन तब किसानों ने आंदोलन करके ऐसा नहीं होने दिया था। अब प्रदेश सरकार द्वारा इन शुगर मिलों को बेचने के मामले में सीबीआई जांच कराई जा रही है। जांच में बिजनौर की दोनों शुगर मिल भी शामिल हैं। मिल की बिक्री, स्टांप ड्यूटी संबंधी दस्तावेज शासन ने तलब कर लिए हैं। देखा जा रहा है कि उस समय बाजार कीमत और मिली की बिक्री कीमत में कितना अंतर था। उपमहानिरीक्षक निबंधक अजय त्रिपाठी के अनुसार बिजनौर शुगर मिल की बिक्री में सात करोड़ 33 लाख का कम स्टांप शुल्क मिलने की बात सामने आई है। सभी कागजात शासन को भेज दिए गए हैं।
दी गई थी सबसे बड़ी स्टांप ड्यूटी
मिलों की खरीदारी में जिले की सबसे बड़ी स्टांप ड्यूटी दी गई थी। बिजनौर शुगर मिल पर तीन करोड़ 51 लाख 80 हजार और चांदपुर शुगर मिल पर करीब पांच करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी दी गई थी। शुगर मिल कर्मचारियों का वेतन देने तथा अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए चीनी को गिरवी रखकर बैंकों से ऋण लेती हैं। बिजनौर शुगर मिल ने भी यूपी कोऑपरेटिव बैंक से चीनी के बदले छह करोड़ रुपये का ऋण मांगा था, लेकिन बैंक ने ऋण देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि वेब इंडस्ट्रीज द्वारा मिलों को फिर से सरकार को देने की पेशकश की र्गई है। इस कारण बैंक ने फिलहाल शुगर मिल को कर्ज देने से इंकार कर दिया है।