संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़। सरकार की उदासीनता के चलते कालागढ़ में सैकड़ों परिवार बेघर होने के कगार पर हैं। कालागढ़ के नागरिकों ने हक हकूक देने की मांग उठाई है। कालागढ़ में रामगंगा बांध परियोजना के निर्माण के समय से ही लोग रहने लगे थे, बांध परियोजना का निर्माण पूरा होने के बाद 1974 में कालागढ़ एक विशाल नगर बन गया। यहां स्कूल कॉलेज खुले, बाजार विकसित हुए। लोगों को राशन कार्ड आदि की सुविधा दी गई। परियोजना के निर्माण से ही लगभग 60 वर्ष से लोग यहां रह रहे हैं। 1990 के दशक में कालागढ़ की भूमि को खाली कराकर वन विभाग को सौंपने का काम शुरू हुआ। 2018 तक प्रशासन ने काफी संख्या में बिना राहत दिए ही पलायन करने को मजबूर कर दिया था।
प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी स्थानीय भूमि का भौतिक निरीक्षण तो कर रहे हैं लेकिन जनता के दुख दर्द को दूर करने की बात नहीं करते। आम आदमी पार्टी के नगर अध्यक्ष परशुराम का कहना है कि कालागढ़ की जनता को न्याय दिए जाने के लिए सरकार एक नीति निर्धारित करें।
लोकायुक्त कार्यालय से भी 2006 में एक याचिका पर आदेश पारित किया गया था। 18 साल बीतने के बाद भी सरकारें कालागढ़ की जनता के लिए कोई नीति निर्धारित नहीं कर सकी। इसी कारण जनता बेघर होने के कगार पर है।