बिजनौर में ग्राम पंचायत द्वारा 22 हजार रूपए में खरीदी गई ऐसी ठेली।
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माल पांच हजार का, भुगतान 25 हजार
बिजनौर। ग्राम पंचायतों के अपने क्षेत्र में विकास कराने का अधिकार मिला तो उन्होंने खूब खेल किया। खूब बारे न्यारे हुए। सबसे ज्यादा लाभ में ग्राम सचिव रहे। एक ही फर्म से सेटिंग करके सभी तरह का माल लिया जाता है। हाल यह है कि कूड़ा ढोने वाली ठेली 25-25 हजार रुपये में खरीदी गई हैं। बैंचों के बिल भी प्रधानों और सचिवों ने तीन तीन लाख रुपये के बनवा दिए हैं। जबकि कूड़ा उठाने वाली तीन से चार हजार रुपये और बैंच बनवाने की कीमत मात्र बीस से 25 हजार रुपये होती है।
प्रधान कहते हैं कि वे चुनकर आए तो बिल्कुल नए थे। कुछ जानकारी नहीं थी। जनपद में सफाई अभियान शुरू हुआ था। जिला प्रशासन ने कहा कि पंचायतों के लिए कूड़ेदान खरीदो। प्रधान को पता भी न चला और सचिवों ने ही सब अपने स्तर से खरीदारी कर ली। हालत यह रही कि कुछ तेज तर्रार सचिव ने तो ग्राम पंचायत के खातों में अपने नाम अपडेट करा लिए। प्रधान को कानों-कान भनक भी नहीं हुई। वे अपने स्तर से ही सब खरीद फरोख्त करते रहे। पंचायतों में पैसा आता रहा। धीरे-धीरे प्रधान भी समझने लगे तो मिलजुल कर खेल शुरू हो गया। इस खेल में कुछ कंपनी भी शामिल हो गईं। जो प्रधान और सचिव से मिलकर सामान की आपूूर्ति करने लगीं।
सूत्रों की मानें तो पूरे जनपद में दो-तीन कंपनी ही ग्राम पंचायत में सामान की आपूर्ति कर रही हैं। इनसे सब माल मिलता है। डिजीटल कैमरों की जरूरत पड़ी तो उन्होंने कैमरे सप्लाई किए। स्ट्रीट लाइट की आपूर्ति की और सैनिटाइजर, सैनिटाइजर मशीन बेचीं। इन्होंने ही गांव में ठंडे पानी की मशीन भी लगाईं। रेट की हालत यह रही कि आपस में तय कर लिया कि बिल कितने का लेना है बस। मूल खर्च निकालकर सब बंदर बांट कर लिया गया। गांव के चौराहों पर यात्रियों के लिए बैंच बनवाई गईं। इसकी लागत बीस से पच्चीस हजार आनी चाहिए। किंतु इनके बिल तीन लाख तक के दिखाए गए। कूड़ा उठाने की सादी ठेली तीन-चार हजार की आ जानी चाहिए, किंतु ये बीस हजार से 25 हजार रुपये में खरीदीं गईं। अफजलगढ़ की एक ग्राम सभा में दो ठेली खरीदी गईं। इसका बिल 45,360 रुपया दिखाया गया। इन बिलों को देखकर किसी अधिकारी की आंख नहीं खुलीं। किसी से कोई पूछताछ आज तक नहीं हुई।
सचिव मनमानी से कर रहे भुगतान : मुकेश दहिया
बिजनौर। अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संघ जिलाध्यक्ष मुकेश दहिया के अनुसार सचिवों ने प्रधानों को बिना बताए डोंगल लगाकर ठेकेदारों को भुगतान कर दिया है। सचिवों के रवैये से जिले के ज्यादातर ग्राम प्रधान परेशान हैं। प्रधानों के बाकी कराए गए काम का तो भुगतान अब तक नहीं हुआ है लेकिन फॉगिंग मशीन आदि के भुगतान तुरंत किए जा रहे हैं।