बिजनौर में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइल्ड फंड) की टीम ने सोमवार को लोअर गंगा कैनाल से तीन मीटर लंबे एक घड़ियाल को रेस्क्यू कर गंगा में छोड़ा है। माना जा रहा है कि यह घड़ियाल वर्ष 2009 में टीम द्वारा गंगा में छोड़ा गया था। लोअर गंगा कैनाल में फंसा होने के कारण इसकी जान पर बन आई थी। टीम द्वारा तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद इसे कैनाल से पकड़ा गया।
वर्ल्ड वाइल्ड फंड और वन विभाग द्वारा गंगा में डॉल्फिन की गणना के लिए सर्च अभियान चलाया जा रहा है। परियोजना अधिकारी संजीव यादव व सीनियर प्रोजेक्ट ऑफिसर मोहम्मद शाहनवाज खान के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान में टीम को अब तक 16 डॉल्फिन व 15 घड़ियाल दिखाई दे चुके हैं।
रविवार शाम को टीम को पता चला कि एक घड़ियाल नरौरा बैराज में लोअर गंगा कैनाल में चला गया था। अब कैनाल का गेट बंद होने के कारण वह दूसरी ओर फंस गया है। वहां पर पानी भी बहुत कम है। टीम मौके पर पहुंची तो पाया कि घड़ियाल की लंबाई करीब तीन मीटर तक थी। टीम ने अपने साथियों के साथ मिलकर तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे पकड़कर पानी से बाहर निकाला और सुबह होने पर गंगा में छोड़ा।
टीम का मानना है कि यह घड़ियाल 2009 में ही गंगा में छोड़ा गया था। उस समय इसकी लंबाई करीब एक से सवा मीटर तक रही होगी। यह घड़ियाल अभी भी वयस्क नहीं है। गंगा में इतना बड़ा घड़ियाल मिलने से टीम के सदस्य भी गदगद हैं।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी संजीव यादव के अनुसार टीम द्वारा रेस्क्यू किया गया घड़ियाल काफी बड़ा था। कई क्षेत्रों में पांच मीटर लंबे तक घड़ियाल मिलते हैं। गंगा में टीम द्वारा छोड़ा गया घड़ियाल मिलने से सभी में फिर से उत्साह भर गया है।