नजीबाबाद के गांव गौसपुर में खेतों का कटान करती गंगा नदी।
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नांगलसोती/नजीबाबाद में पर्वतीय व मैदानी क्षेत्रों में हो रही बारिश से नदियों का बढ़ा जलस्तर तबाही मचाए हुए है। गंगा नदी के उफान ने गौसपुर के किसानों की 10 बीघा से अधिक जमीन लील ली है। गंगा नदी का कटान करते हुए गांव की ओर बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत है। क्षेत्र में तटबंध न बनाए जाने से ग्रामीणों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति रोष है
पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश से बरसाती नदियां उफान पर हैं। मालन, कोटावाली, रवासन, सूखरो और गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। कोटावाली नदी के उफान ने कोटावाली रपटे व पुल को मालन ने कछियाना, पाईबाग, शाहपुर क्षेत्र के किसानों की जमीन का कटान किया है। वहीं सूखरो नदी क उफान में जट्टीवाला में कार सेवकों द्वारा बनाए पुल क्षेत्र में कटान से तबाही मच गई है। बुधवार व बृहस्पतिवार गंगा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। गंगा के उफान ने गांव गौसपुर में किसानों पूर्व प्रधान राजेश, सुनील, चरन सिंह, कमला देवी, धर्म सिंह, राजपाल, राजवीर, सन्नी की करीब 10 बीघा से अधिक जमीन लील ली है। नदी के उफान ने तटीय किसानों की गन्ना, चारा व धान की खड़ी फसल को बर्बाद कर दिया है। ग्रामीणों ग्राम प्रधान मुन्ने सिंह, हरपाल, अवनीश, अरविंद, रामस्वरूप, विजय का कहना है कि हर साल बरसात के दिनों में गंगा नदी के उफान में उनकी खेतों की जमीन, फसल बर्बाद हो जाती है। गंगा के उफान से होने वाली तबाही पर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि गांव का दौरा कर तटबंध बनवाने की बात तो करते हैं लेकिन बरसात के बाद उनके आश्वासन भी काफूर हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के उदासीन रवैय्य के कारण गंगा कटान करती हुए गांव से मात्र 100 मीटर की दूरी पर रह गई है। प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए तो गांव गौसपुर बाढ़ से तबाह हो जाएगा। ग्रामीणों ने गंगा के प्रकोप से बचाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।