बिजनौर के ग्राम रावली क्षेत्र में पलेज को नष्ट कराती वन विभाग की टीम।
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बिजनौर में गंगा की जमीन में होने वाली पलेज व अन्य फसल की बुवाई करने के खिलाफ प्रशासन ने अभियान छेड़ दिया है। पलेज को नष्ट कराने के लिए वन विभाग, सिंचाई व राजस्व विभाग की टीमों को लगाया है। बृहस्पतिवार को टीम ने रावली क्षेत्र में जमीन की पैमाइश की। वहां सिंचाई विभाग की करीब 60 बीघा जमीन पर गांववालों का कब्जा निकला। जमीन पर ट्रैक्टर चलाकर फसल नष्ट कराई गई। दोबारा कब्जा करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
गंगा के रावली क्षेत्र में हजारों बीघा जमीन है, जिसे वन विभाग, सिंचाई तथा गांव वाले जमीन को अपनी बताते हैं। इसके अलावा गंगा की धारा से छोड़ी गई जमीन पर गांव वाले जमीन पर कब्जा कर पलेज लगाते हैं। महाकुंभ के आयोजन को देखते हुए इस पलेज के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। गंगा किनारे की जमीन पर लोग कब्जा करके पलेज लगाने के साथ गेहूं की फसल की बुवाई करते हैं। राजस्व, वन विभाग व सिंचाई विभाग की टीम अवैध पलेज को नष्ट करा रही है। बृहस्पतिवार को सिंचाई विभाग व वन विभाग ने राजस्व विभाग की टीम को साथ लेकर जमीन की पैमाइश कराई। राजस्व टीम की जांच के आधार पर गांववाले के कब्जे की 60 बीघा जमीन सिंचाई विभाग की निकली। इस जमीन पर गेहूं की बुवाई कर रखी थी। सिंचाई विभाग ने ट्रैक्टर से जमीन को जुतवाकर फसल नष्ट कराकर जमीन को अपने कब्जे में ले लिया। गांववालों को जमीन पर दोबारा कब्जा करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। रेंजर शरद कुमार गुप्ता ने बताया कि सरकारी जमीन को चिह्नित करने का काम जारी रहेगा। सरकारी जमीन पर खड़ी फसल को नष्ट किया जाएगा। इस दौरान डिप्टी रेंजर राजकुमार पाठक, मदनपाल, सिंचाई विभाग के जिलेदार संजय गुप्ता, पंकज कश्यप आदि मौजूद रहे।
उत्तराखंड भी जाती है सब्जी
पलेज में गेहूं के अलावा सब्जियों की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। पलेज में सब्जी इतनी ज्यादा जमीन में बोई जाती हैं कि ये उत्तराखंड में भी सप्लाई की जाती हैं। सरकारी कर्मचारियों की शह पर जमीनों पर अवैध कब्जे करके खेती की जाती है। इन खेतों में कीटनाशक का इस्तेमाल भी बड़े पैमाने पर किया जाता है, जिससे गंगा के पानी में जहर घुलने लगता है।