मान्यता है कि मुश्किल कुशा मौला अली दरगाह आए थे। उन्हीं की याद में सालाना मजलिसें आयोजित की जाती हैं। देश के कोने-कोने से शिया जायरीन दरगाह पहुंचकर भीषण गर्मी और कई तरह की परेशानियों को झेलकर रात-दिन चलने वाली मातमी मजलिसों में शिरकत करते हैं और दरगाह की जियारत कर मन्नतें मांगते हैं।
नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी दरगाह कमेटी की ओर से जायरीनों के ठहरने, खाने-पीने, बिजली आदि की व्यवस्था उनके खर्च पर दी जाती है। दरगाह कमेटी की ओर से दरगाह परिसर में 125 आवास जायरीनों के सहयोग से बनाए गए है, जबकि 250 प्राइवेट आवास हैं। दरगाह परिसर में हजारों वैकल्पिक तंबू लगाए गए हैं, जिनमें चार दिन तक जायरीन रहकर सालाना मजलिसों में शिरकत करेंगे।
उपजिलाधिकारी विजय वर्धन तोमर, सीओ गजेंद्र पाल सिंह, नगीना सीओ संग्राम सिंह के नेतृत्व में सालाना मजलिसों में आने वाले जायरीनों को सुरक्षित यातायात, स्वास्थ्य, पेयजल, सफाई आदि की व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। दरगाह कमेटी की ओर से पेयजल सुविधा के लिए 50 से अधिक वैकल्पिक इंडिया मार्क-2 हैंडपंप लगाए गए हैं।
उधर, नजीबाबाद डिपो की ओर से स्टेशन से दरगाह परिसर तक के करीब आठ किलोमीटर दूरी के सफर के लिए रोडवेज बसों की व्यवस्था जुटाई गई है। 25 मई को प्रात: आठ बजे से चार दिन तक अनवरत चलने वाली मातमी मजलिसों का सिलसिला शुरू होगा।