कालागढ़ में नेशनल ग्रीन ट्ब्यिूनल (एनजीटी) ने वन संरक्षित क्षेत्रों के भवनों को 15 दिन में ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। इससे लोगों में हड़कंप मच गया है।
रामगंगा बांध परियोजना की भूमि को वन विभाग को सौंपे जाने का मामला 1995 से अदालतों में चल रहा था। मामला सुप्रीम कोर्ट से होता हुआ एनजीटी में पहुंच गया। 26 जुलाई को मामले की एनजीटी में सुनवाई हुई। इस पर चेयरपर्सन न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार ने कोरम टीएन गोदावर्मन की याचिका डब्ल्यूपीसी 202 ऑफ 1995 के तहत दिए आदेशों में कहा कि 15 दिनों में संरक्षित क्षेत्र के स्ट्रक्चर को ध्वस्त कर दिया जाए। साथ ही उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव सिंचाई, उत्तराखंड के मुख्य सचिव के साथ दो सप्ताह में बैठक कर सारे मामले को समाप्त करें। पांच सितंबर को मामले की सुनवाई में रखे। इस विषय में रामगंगा बांध परियोजना के ईई सीमांत ने बताया कि कोर्ट के जो भी आदेश हैं, उनका पालन किया जाएगा।
करोड़ों के भवन हो जाएंगे ध्वस्त !
1960 के दशक के दौरान रामगंगा बांध परियोजना के लिए लगभग साढ़े पांच हजार आवासीय व सैकड़ों आवासीय भवनों को बनाया गया था। 1995 से एनजीओ ने परियोजना की जमीन को वन विभाग को वापस करने की मांग अदालत के जरिये की थी। इस पर अब मामला एनजीटी में चल रहा है। परियोजना वन विभाग की जमीन पर बनी है। अब एनजीटी के वर्तमान आदेश आने के बाद से नगर में जबरदस्त हड़कंप मचा हुआ है। नागरिकों, दुकानदारों भविष्य को लेकर चिंता का माहौल है।