- पिछले वर्ष जून 22 की गणना में करीब 117 सारस मिले थे
- भारत वर्ष के लगभग 10 प्रतिशत सारस जिले में पाए जाते हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जनपद में सारस की संरक्षण के लिए वन विभाग अभियान चलाएगा। विभाग जनपद के ऐसे वेटलैंड की सूची तैयार की है, जहां पर सारस सबसे ज्यादा दिखाई दिए। पिछले वर्ष जून 2022 में वन विभाग की गणना में करीब 117 सारस मिले थे। अफसरों के अनुसार पूरे भारत वर्ष के लगभग 10 प्रतिशत सारस बिजनौर जनपद में ही पाए जाते हैं। बिजनौर, चांदपुर व धामपुर रेंज में सारस संरक्षण के लिए करीब 156 लाख रुपये की परियोजना बनाई है।
बिजनौर में सामाजिक वानिकी प्रभाग के तहत बिजनौर, चांदपुर एवं धामपुर रेंज में ऊसर क्षेत्र होने के कारण तथा नहरों का जाल बिछा होने के कारण मौसम में नमी रहती है। इन क्षेत्र में छोटे, बड़े तालाब हैं। इस कारण यहां सारस पक्षी एवं स्थानीय पक्षियों के साथ बहुत संख्या में पाए जाते हैं। साथ ही अन्य प्रवासी पक्षी भी सर्दियों में यहां आते हैं। वर्तमान में गंगा बैराज एवं नारनौर झील आदि वेटलैंड में पिछले सालों में पक्षियों का संरक्षण एवं प्रबंधन का कार्य लगातार किया जा रहा है।
जनपद के कई क्षेत्र सारस पक्षी के प्रवास के लिए जाने जाते हैं। सामाजिक वानिकी प्रभाग प्रभागीय निदेशक अरुण कुमार सिंह ने कहा कि जहां पर सारस सबसे ज्यादा दिखाई देते हैं। अभियान चलाकर वहां विभाग की ओर से सारस संरक्षण कराया जाएगा।
सारस के साथ दिखाई देती हैं अन्य प्रजातियां
वन विभाग के अफसरों ने बताया कि जनपद बिजनौर में चयनित वेटलैंड में गाद एवं जलकुंभी की मात्रा ज्यादा हो गई है, जिसे निकालकर वेटलैंड का सुंदरीकरण किया जाएगा। कार्य के साथ ही साथ सीमांकन किया जाना है। संपूर्ण वेटलैंड क्षेत्रों में सारस, स्टार्क, किंगफिशर, कार्मोरेन्ट, आइबिस, डक्स आदि प्रजातियां प्रचुर संख्या में देखी जा सकती हैं।