- दो मार्च 2013 को दुष्कर्म और हत्या के मामले में सुनाई गई थी सजा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। बालक न्यायालय की न्यायाधीश पारुल जैन ने एक किशोर की अपील को निरस्त करते हुए किशोर न्याय बोर्ड द्वारा उसे सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। किशोर न्याय बोर्ड ने किशोर को हत्या के मामले में दोषी पाते हुए तीन वर्ष के लिए विशेष गृह में भेजे जाने का आदेश दिया था।
थाना अफजलगढ़ के एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी आठ वर्षीय लड़की अपनी पांच वर्षीय चचेरी बहन के साथ 14 दिसंबर 1995 को सुबह 11 बजे गोबर पाथने पेट्रोल पंप के पीछे पथवारे में गई थी। दोपहर 12 बजे चचेरी बहन तो वापस आ गई। जब उससे अपनी बेटी के बारे में पूछा गया तो उसने बताया कि जब गोबर पाथकर वापस आ रहे थे तो उसकी बहन को एक आदमी गोला उठाने के बहाने बुलाकर ले गया। शाम तक वापस नहीं आने पर उसकी तलाश की गई। अगले दिन उसका शव एक खेत में मिला था।
इस मामले में पुलिस ने किशोर के खिलाफ हत्या और बलात्कार के आरोप में चार्जशीट दाखिल की थी। इस निर्णय सुनाते हुए दो मार्च 2013 को किशोर काे सजा सुनाई गई थी। उसे तीन वर्ष के लिए विशेष गृह में भेजा जाए। इस आदेश के विरुद्ध किशोर की तरफ से अपील दाखिल की गई थी। जिसे बालक न्यायालय ने निरस्त करते हुए सजा को बरकरार रखा है।