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Bijnor News: गुलदार पकड़ने के लिए जंगल छान रहा वन विभाग

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नगीना। क्षेत्र के ग्राम जलालपुर में गुलदार के हमले में युवक की मौत के करीब दो सप्ताह तक जंगल की खाक छानने के बाद भी वन विभाग की पूरी फौज हमलावर गुलदार को पकड़ना तो दूर चिह्नित भी नहीं कर पाई हैं। ग्रामीणों की नाराजगी के बाद वन विभाग के कर्मचारियों को गांव में बनाया गया अपना कैंप कार्यालय बंद कर दोनों हथिनी को भी नर्सरी में भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा।
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27 जुलाई को क्षेत्र के ग्राम जलालपुर में गुलदार के हमले में 20 वर्षीय युवक की मौत हो गई थी। आक्रोशित ग्रामीणों व किसान यूनियन के नेताओं के दबाव के बाद वन विभाग ने हमलावर गुलदार को पकड़ने के लिए उसे नरभक्षी घोषित करते हुए प्रदेश के कई जिलों की टीमों को गुलदार को पकड़ने के लिए मैदान में उतार दिया था। दुधवा राष्ट्रीय पार्क लखीमपुर खीरी से डायना व सुलोचना नामक दो हथिनी भी कांबिंग के कार्य के लिए गांव में भेज दी गईं थीं। जगह जगह पिंजरे लगाकर कैमरे भी लगाए, ड्रोन का सहारा भी लिया, विशेषज्ञों के साथ-साथ डब्लू टी ओ की टीम को भी मैदान में उतर गया लेकिन सभी को मायूस होना पड़ा।
वन विभाग के प्रदेश स्तर के आला अधिकारियों ने खुद मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया तथा नरभक्षी गुलदार को मारने तक के आदेश दे दिए लेकिन हर जतन करने के बाद भी गुलदार पकड़ा जाना तो दूर चिन्हित भी नहीं हो पाया। गुलदार गांव व आसपास के क्षेत्र में बार-बार अपनी दस्तक देकर ग्रामीणों को डरा रहा हैं। चार दिन में 39 किलोमीटर कांबिंग करने के बाद सुलोचना हथिनी के दोनों पैरों में सूजन आ गई थी, जिसके बाद दोनों हथिनी में से किसी ने भी कांबिंग का कार्य नहीं किया।
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नगीना वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप शर्मा का कहना है कि लगातार पिंजरों व कैमरों की लोकेशन बदली जा रही है। तीन टीमें लगातार गश्त कर रहीं हैं जबकि पांच पिंजरे व 10 कैमरे गुलदार को ट्रेस करने में लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि जलालपुर में बनाया गया कैंप कार्यालय बंद कर दिया गया है अब नगीना वन क्षेत्रीय कार्यालय तथा तेलीपुरा में स्थित भट्ठे से ही गांव में टीमें भेजकर वहां से ही पूरा सर्च अभियान चलाया जा रहा है।
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