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देशी गायों का बढ़ा रूझान लेकिन विदेशी गाय अब भी ज्यादा

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विदेशी नस्ल की गाय बनीं जिले के पशुपालकों की पहली पसंद
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बिजनौर। देशी गायों की संख्या बढ़ाने के तमाम प्रयास के बावजूद विदेशी एचएफ व जर्सी गाय अब भी जिले में किसानों के लिए पहली पसंद बनी हैं। हालांकि किसान अब धीरे-धीरे देशी गायों की ओर रुख कर रहे हैं, मुरादाबाद, अमरोहा और रामपुर में देशी गायों की संख्या में वृद्धि हुई है।
बिजनौर जिला खेती के लिए जाना जाता है। खेती के साथ दुग्ध उत्पादन सबसे प्रमुख व्यवसाय है। किसान दुग्ध उत्पादन के लिए गाय, भैंस पालते हैं। पहले जिले में भैंस ज्यादा पाली जाती थीं लेकिन अब गायों की ओर किसानों का रुझान बढ़ा है। पहले जिले में देशी और विदेशी गायों की संख्या लगभग एक सी थी। कुछ साल पहले जिले के किसानों ने दुग्ध उत्पादन का काम बढ़ाया तो विदेशी प्रजाति की गाय एचएफ व जर्सी को अपना लिया। इन गायों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी। इस बीच भाजपा सरकार ने किसानों को देशी गाय पालने के लिए प्रेरित करना शुरू किया। किसानों अब धीरे धीरे देशी गायों की ओर लौट रहे हैं लेकिन अब भी इनकी संख्या विदेशी गायों से कम ही है। पशुपालन विभाग द्वारा हुई पशुगणना में ये आंकड़े सामने आए हैं। हालांकि मंडल के बाकी जिलों के किसान देशी गाय के पालन में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। वहां देशी गायों की तादाद विदेशी गायों से ज्यादा है।
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2007 की पशु गणना के आंकड़े
जिला विदेशी गाय देशी गाय कुल
बिजनौर 136040 133776 266982
मुरादाबाद 31148 173937 205085
रामपुर 23544 128851 152395
अमरोहा 18685 111448 130133
2020 की पशु गणना के आंकड़े
जिला विदेशी गाय देशी गाय कुल
बिजनौर 197265 181025 378290
मुरादाबाद 80457 96477 176934
रामपुर 38769 67327 106096
अमरोहा 103197 113452 216649
नोट: आंकड़े पशुपालन विभाग से लिए गए हैं।
साहिवाल है पहली पसंद
देशी प्रजाति में मुख्य रूप से साहिवाल गाय किसान पाल रहे हैं। इसके अलावा कुछ किसानों के पास गिरि गाय भी है। विदेशी प्रजाति में मुख्य रूप से जर्सी व एचएफ गाय पाली जा रही हैं। देशी गाय में बीमारी नहीं आती हैं जबकि विदेशी गाय बांझपन का शिकार हो जाती हैं।
देशी गाय के दूध के दाम ज्यादा
गायों का दूध डेरियों पर फेट के आधार पर बिकता है। विदेशी गाय का दूध मात्रा में तो ज्यादा होता है लेकिन इसमें गाढ़ापन कम होता है। इसके दूध की कम कीमत मिलती है। देशी गाय के दूध का दाम भैंस के दूध के बराबर भी मिल जाता है।
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देशी गायों को भी अपना रहे किसान
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.भूपेंद्र सिंह के अनुसार पशुगणना के आधार पर विदेशी गायों व क्रॉस ब्रीड की संख्या देशी से ज्यादा है। किसान अब देशी गाय पालने पर भी जोर दे रहे हैं।
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