बिजनौर में सड़क हादसे में घायल हुए नेपाल के लोग रातभर जिला अस्पताल में भूखे प्यासे रहे। किसी ने उनकी नहीं सुनी। गंभीर रूप से घायलों को शुक्रवार सुबह जिला अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। घायल, चिकित्सकों से गुहार लगाते रहे कि वह अभी चलने फिरने लायक नहीं हैं, पर किसी ने उनकी एक नहीं सुनी। बाद में हिंदू संगठन के लोग आगे आए और उन्होंने घायलों की मदद की।
बुधवार रात करीब ढाई बजे नेपाल से शिमला जा रही मिनी बस बैराज रोड पर माउंट लिट्रा स्कूल के पास चालक को नींद की झपकी लगने के कारण अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई थी। हादसे में नेपाल के जिला रूकमपुर निवासी बलबहादुर, अनिल रोका व सबीन की मौत हो गई थी। तिलक, उमेशचंद्र, चंद्र प्रसाद, अर्जुन, दिनेश, रमेश, हरिवुड़ा, सेरमवुड़ा, शध्यान, संतोष, बृज बहादुर, शोभा, हरिबहादुर, टुक हरेपा, होमर घायल हुए थे। उमेश और चंद्र प्रसाद को मेरठ रेफर कर दिया गया। मेरठ मेडिकल में तिमारदारों के पास खाने पीने के लिए पैसा न होने के कारण वह चंद्रप्रकाश व उमेश को लेकर शुक्रवार सुबह बिजनौर आ गए। उमेश के मुंह की हड्डी में फैक्चर है। शरीर पर कई जगह गंभीर चोटें हैं। इसके बाद भी जिला अस्पताल में उसे फिर से भर्ती करने से चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए। दिनभर उमेश जिला अस्पताल में पड़ा तड़पता रहा। दूसरे घायल चंद्र प्रसाद को उसके साथी, चिकित्सकों के भर्ती न करने पर नूरपुर मार्ग स्थित एक ढाबे पर ले गए। वह ढाबे पर पड़ा कराहता रहा।
वहीं जिला अस्पताल में भर्ती घायल रातभर तड़पते रहे। किसी ने उनकी सुध नहीं ली। घायल हरिवुड़ा के दोनों पैर में गंभीर चोट है। अर्जुन रोका के सीने में दोनों ओर व कमर में चोट है। बाकी घायलों का भी यही हाल है। घायलों की हालत इतनी खराब है कि वह चलने फिरने के भी काबिल नहीं है। इसके बाद भी चिकित्सकों ने शुक्रवार सुबह इन सब घायलों को जिला अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। ये घायल चिकित्सकों से गुहार लगाते रहे कि वह चल फिर भी नहीं सकते हैं। अभी वे ठीक नहीं हुए हैं, पर किसी ने उनकी नहीं सुनी। हिंदू संगठनों से जुड़े मयंक मयूर, सुभाष वाल्मीकि, नीरज विर्श्नोई, नमामि गंगे के संयोजक सौरभ सिंघल, शूरवीर सिंह, राहुल राजपूत, हर्ष टांक, व्यापारी नेता गजेंद्र सिंह सहित तमाम लोग जिला अस्पताल पहुुंचे व घायलों को फिर से जिला अस्पताल में दाखिल कराया।
डीएम ने मुख्य चिकित्साधीक्षक को दिए आदेश
जिलाधिकारी अटल कुमार रॉय ने मुख्य चिकित्साधीक्षक को आदेशित किया कि सभी घायल नेपालियों निशुल्क इलाज हो। मेरठ से आए उमेश को भर्ती करा दिया। प्रभारी सीएमएस सुखबीर सिंह के मुताबिक घायलों को डिस्चार्ज करने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। ऐसा हुआ है तो मामले में कार्रवाई की जाएगी। घायलों का सही उपचार होगा।
तीमारदारों को ढाबे पर दिलाई शरण
तीमारदारों को नेपाल से ट्रेवल एजेंसी से आई दूसरी बस जिला अस्पताल से नूरपुर मार्ग स्थित एक ढाबे पर ले गई। ढाबे पर उनका सामान जमा कराकर उनके खाने पीने की व्यवस्था कराई। अस्पताल में अफवाह फैल गई कि बस घायलों को लेकर नेपाल चली गई है। हिंदू संगठन के लोगों ने जांच पड़ताल की तो सब लोग नूरपुर रोड स्थित ढाबे पर मिले।