बिजनौर में कांग्रेस की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाई गई पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार का बिजनौर की राजनीति से गहरा नाता रहा है। पहली बार मीरा कुमार बिजनौर से ही सांसद चुनी गई थीं। 1985 में हुए लोकसभा के उपचुनाव में मीरा कुमार ने वर्तमान केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को मात दी थी। दोनों के बीच चुनाव में कड़ा मुकाबला रहा था। उस समय देशभर की नजरें बिजनौर लोकसभा सीट पर ही टिकी थीं।
1984 में कांग्रेस के सांसद गिरधारी लाल के निधन के बाद बिजनौर सीट खाली हो गई थी। 1985 में उपचुनाव हुआ। बिजनौर सुरक्षित सीट से कांग्रेस ने पूृर्व उपप्रधानमंत्री दलित नेता जगजीवनराम की पुत्री मीरा कुमार को मैदान में उतार दिया। लोक दल ने रामविलास पासवान पर दांव खेला। पासवान का खेत जोतता किसान चुनाव चिन्ह मिला था। मीरा कुमार ने रामविलास पासवान को करीब तीन हजार वोटों से हराया था। उनका सियासी सफर बिजनौर से शुरू हुआ। इसके बाद मीरा कुमार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और नई ऊंचाइयां छूती चली गईं।
1985 के लोकसभा उपचुनाव में तमाम बड़े नेताओं ने बिजनौर में डेरा डाल दिया था।
देश-विदेश का मीडिया भी यहां पहुंचा था। चुनाव के दौरान रामविलास पासवान की खूब धूम थी। हर कोई उनकी जीत पक्की मान रहा था, पर ऐन वक्त मीरा कुमार ने पांसा पलट दिया। मीरा कुमार बिजनौर से केवल एक ही बार चुनाव लड़ीं। इसके बाद उन्होंने बिजनौर की ओर झांककर भी नहीं देखा।
उधर, हार से तिलमिलाए रामविलास पासवान कुछ समय तक बिजनौर के लोगों के संपर्क में रहे, लेकिन वे फिर कभी बिजनौर से चुनाव नहीं लड़े। इसके बाद 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती पहली बार बिजनौर से सांसद बनीं। इस तरह मायावती का सियासी सफर भी बिजनौर से ही शुरू हुआ।