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पहाड़ की बारिश से गंगा खादर में बाढ़ के हालात, मालन भी उफनी

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मंडावर क्षेत्र में गंगा से हो रहे कटान को देखते ग्रामीण। - फोटो : BIJNOR
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बिजनौर। पहाड़ पर हो रही लगातार बारिश से गंगा खादर में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। ब्रह्मपुरी गांव के कुछ घरों में गंगा का पानी घुस गया, जिसके बाद उन्होंने तटबंध पर बसेरा बना लिया है। गंगा का पानी भरने से जलीलपुर-सलेमपुर मार्ग भी बाधित हो गया। बिजनौर बैराज पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 30 सेमी कम 219.70 मीटर पर बना हुआ है। पुलिस ने खादर के गांवों में बाढ़ का एलान कराया है और लोगों को गंगा की तरफ नहीं जाने की सलाह दी है।
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रविवार की सुबह आठ बजे हरिद्वार के भीमगौडा बैराज से गंगा में 142729 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। रात में डेढ़ लाख क्यूसेक से भी अधिक पानी छोड़ा गया था। बिजनौर बैराज से गंगा में 183000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। मालन नदी भी उफनी हुई है। एडीएम अरविंद कुमार सिंह और तहसीलदार ने खादर के गांव कोहरपुर, डैबलगढ़, दयालवाला आदि में गंगा के उफान का जायजा लिया और ग्रामीणों को आपात स्थिति में हर संभव मदद करने का भरोसा दिया है। बाढ़ चौकियां भी अलर्ट मोड में हैं।
गंगा खादर क्षेत्र के गांव सलेमपुर ढोलनपुर, फेजीपुर एवं महमूदा खादर के जंगल में गंगा का पानी आने से बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। जलस्तर बढ़ने से जलीलपुर सलेमपुर मार्ग पर करीब दो फुट पानी बह रहा है और इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है। सीओ सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। ननवा सिंह, दिनेश कुमार, संजीव कुमार ने बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए स्थायी हल निकालने की मांग की है।
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खादर में पशुओं के चारे का संकट गहराया
बेगावाला। ब्रहमपुरी और रावली के बीच बने रपटे पर पानी बह रहा है। ग्रामीण चारा लाने के लिए नहीं जा पा रहे हैं। ब्रह्मपुरी गांव की नई बस्ती के कुछ लोगों ने घरों में पानी भरने पर गंगा के तटबंध पर डेरा डाल दिया है। ग्रामीण आवागमन के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना बहुत मुश्किल हो गया है। उन्होंने यह भी बताया की बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं। संवाद
गंगा का जलस्तर बढ़ने से फ़सले जलमग्न
चंदक। मंडावर थाना क्षेत्र के गंगा खादर में फसल जलमग्न होने के साथ साथ दर्जनों गांवों में भी गंगा कटान का खतरा बढ़ गया है। हजारों बीघा गन्ने और चारे की फसल भी पानी में डूब गई है। जलस्तर बढ़ने के कारण नाव से भी गंगा पार जाना संभव नहीं हो रहा है। ग्राम राजरामपुर, फतेहपुर सभाचंद, कोहरपुर, कुंदनपुर, बादशाहपुर समेत दर्जनों गावों के ग्रामीणों को गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण समस्या का सामना करना पड़ रहा है। संवाद
बाढ़ के साथ बहकर आईं लकड़ियां
चंदक। गंगा का बढ़ा हुआ जलस्तर अपने साथ उत्तराखंड के जंगल से लकड़ी को बहाकर ला रहा है। मैदानी क्षेत्र में गंगा किनारे बसे ग्रामीण गंगा से इन लकड़ियों को पानी से बाहर निकाल लेते हैं, गांव की महिलाएं छोटी-छोटी लकड़ियों को अलग कर उनके गठ्ठर बांध कर घर ले जा रही है।

छाछरी मोड के गांव सलेमपुर में सड़क पर भरे गंगा के पानी से गुजरते लोग।- फोटो : BIJNOR

चंदक क्षेत्र में गंगा में बहकर आने वाले लकड़ियां ले जाती महिला।- फोटो : BIJNOR

चंदक क्षेत्र में गंगा में बहकर आने वाली लकड़ियां को निकालते युवक।- फोटो : BIJNOR

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