गो आधारित खेती से सशक्त होगी खेती
बिजनौर। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिकों व अफसरों ने किसानों को गो-प्राकृतिक खेती करने का महत्व बताया। उन्होंने बताया कि खेती के जीवाणुओं को प्राकृतिक खेती द्वारा सशक्त किया जा सकता है।
शनिवार को कृषि विज्ञान केंद्र नगीना में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विभाग में कार्यरत एटीएम, बीटीएम व प्राविधिक सहायकों को गो आधारित प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने गो आधारित प्राकृतिक खेती से बासमती धान उत्पादन की जानकारी दी। वैज्ञानिक डॉ. शिवांगी ने मृदा की उर्वरता को बनाए रखने एवं जीवांश की वृद्धि के लिए घन जीवामृत आदि के बारे में बताया। डॉ. पिंटू कुमार ने फसलों में लगने वाले कीड़े बीमारियों को गो आधारित प्राकृतिक तरीके से सुरक्षित करने के बारे में जानकारी दी।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत ने गो आधारित प्राकृतिक खेती पर विस्तार से जानकारी दी। कहा कि अब समय गो आधारित प्राकृतिक खेती का है। गो आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। गो आधारित प्राकृतिक खेती के लिए गंगा के किनारे के चार विकास खंडों में 1200 हेक्टेयर क्षेत्रफल चयनित किया है। 50-50 हेक्टेयर के 24 कलस्टर बनाएं गए हैं। रिसोर्स पर्सन व चैंपियन कम्यूनिटी पर्सन को नामित करने का कार्य किया जा रहा है। इसके बाद फार्मर फील्ड स्कूल पर किसानों को प्रशिक्षण दिए जाएंगे।