कासमपुरगढ़ी के गेहूं खरीद केंद्र पर गेहूं से भरे बोरों के ऊपर बैैठा किसान।
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धामपुर/रेहड़ में सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी गेहूं क्रय केंद्र किसानों को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं। क्रय केंद्रों पर साफ सुथरा गेहूं ले जाने के बावजूद किसानों की ट्रॉली गंदा गेहूं बताकर वापस कर दी जाती हैं। किसानों का आरोप है कि केंद्र प्रभारी माफिया का गला सड़ा गेेहूं खरीदकर किसानों से खरीदे गए साफ गेहूं में मिलाकर सरकार को चूना लगा रहे हैं।
भाकियू के मंडल प्रभारी रमेशचंद शेखावत और जिला संगठनमंत्री देवेंद्र कौशिक हसनपुर व मोहद्दीनपुर के क्रय केंद्रों को लेकर डीएम से शिकायत कर चुके हैं। किसान देवराज सिंह, राजकुमार, अभिनव आदि का आरोप है कि तीनों क्रय केंद्र गेहूं माफियाओं की मिलीभगत से चल रहे हैं। इन केंद्रों पर तैनात संचालक किसानों को जमकर छका रहे हैं। हार थककर किसान व्यापारी को ही गेहूं देकर भाग रहा है। केंद्र प्रभारियों के इस रवैये को लेकर गेहूं का समर्थन मूल्य 1735 रुपये होने के बावजूद किसान केंद्रों पर गेहूं बेचने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि क्रय केंद्रों पर घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
यदि केंद्रों पर गेेहूं की तौल करा भी दी तो स्वयं बोरी भरने की नौबत आ जाती है। केंद्रों पर अव्यवस्था हावी होने की वजह से किसान व्यापारियों को ही गेहूं बेचने को मजबूर हैं। हालांकि सरकारी क्रय केंद्रों पर प्रति क्विंटल 10 रुपये का बौनस दिया जा रह है। लेकिन बौनस की रकम को पहले ही मजदूर अपनी दिहाड़ी बताकर किसान से झटकने में लगे हुए हैं। किसानों को दस रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मजदूरों को बोरी भरने का खर्च देना पड़ रहा है। किसान की बोनस की रकम मजदूूूरों में चली जाती है।
केंद्रों पर बदइंतजामी का बोलबाला
क्रय केंद्रों पर बदइंतजामी का इतना बोलबाला है कि किसानों को बैठने तक कोई व्यवस्था नहीं है। अधिकांश क्रय केंद्रों पर किसान को तौल होने तक खड़ा ही रहना पड़ता है। स्वच्छ पेयजल तक की व्यवस्था नहीं है। गर्मी में ही गेहूं की तौल करानी पड़ती है। क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के बाद भी दो दो सप्ताह में भी किसानों की रकम खाते में नहीं आ रही है। ऐसे में जिन किसानों को रकम की जरूरत होती है उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। जबकि सरकार ने अगले ही दिन गेहूं खरीदारी की रकम भेजने का दावा किया है।
खाते में समय से पहुंच रहा पैसा
प्रभारी डिप्टी आरएमओ शिप्रा खंडेलवाल का कहना है कि समय से भुगतान किसानों के खाते में न पहुंचे की बात कोरी अफवाह है। 72 घंटे के अंदर किसानों का भुगतान खाते में डाला जा रहा है। किसी का खाता ही गड़बड़ हो तो बात दूसरी है। बाकी किसानों की शिकायत पर जांच कर केंद्र प्रभारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। किसानों के गेहूं को गंदा बताकर लौटाने का मामला गंभीर है। केंद्रों पर किसानों के लिए समुचित व्यवस्थ्ाा कराने के निर्देश हैं, लेकिन यदि इसमें गड़बड़ी की जा रही है तो मामले की जांच कराई जाएगी।