बिजनौर। प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य में कोई बढ़ोतरी नहीं होने से किसान निराश हुए है। किसान नेताओं ने कहा कि इस बार गन्ना फसल रोग ग्रस्त होने उत्पादन कम हुआ है। किसानों को इस आपदाकाल में गन्ना मूल्य बढ़ोतरी से आर्थिक सहायता मिलती।
भाकियू अराजनैतिक के युवा प्रदेशाध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह ने कहा कि किसान के नाम पर वोट ना होने तथा आंदोलनों का निष्पक्ष न होने का परिणाम गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाना है।
भाकियू अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष नितिन सिरोही ने कहा कि सरकार किसान हितैषी होने का ढोंग करती है। उत्तर प्रदेश के किसान को भी चुनाव के समय वोट की चोट से जवाब जरूर देना होगा।
भाकियू नेता बाबूराम तोमर ने कहा कि महंगे खाद, बीज और फर्टिलाइजर के उपयोग करने के बाद किसानों के गन्ने खेत बीमारी के कारण सूख गए। कहा कि किसानों को अपने हक व अधिकार के लिए आंदोलन के रास्ते को और मजबूत करना पड़ेगा।
भाकियू लोकशक्ति के जिलाध्यक्ष चौधरी वीर सिंह सहरावत ने कहा कि फसल उत्पादन लागत को देखते हुए सरकार को इस बार गन्ना का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित होने की उन्हें उम्मीद थी
किसान नेता महिपाल सिंह तोमर ने बताया कि गन्ना रोग ग्रस्त होने से गन्ना उत्पादन कम एवं खर्च ज्यादा होने किसान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। मूल्य नहीं बढ़ने से किसान अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।