बिजनौर। गंगा एक्सप्रेसवे से हरिद्वार को जोड़ा जाना है, जो बिजनौर से होकर निकलेगा। मगर जिन गांवों में एक्सप्रेसवे के लिए सर्वे किया जा रहा है, उसका विरोध करते हुए गंगा के किनारे निर्माण की मांग उठाई जा रही है ताकि भूमि अधिग्रहण होने के बाद किसानों की रोजी-रोटी पर संकट नहीं आने पाए।
सोमवार को तमाम गांवों के प्रधान और किसान कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को संबांधित ज्ञापन डीएम को दिया। इसमें कहा गया कि बिजनौर से गंगा एक्सप्रेसवे के लिए सर्वे किया जा रहा है। तहसील बिजनौर के मौजा पेदा, मिर्जापुर पूरन, मौ.पुर नौआबाद, इस्माईलपुर, नंगली, चौकपुरी, नसीरी, कच्छपुरा, नयागांव, अलीपुर माखन, गजरौला अचपल आदि गांव में सर्वे किया जा रहा है। कहा कि इन गांव की उपजाऊ एवं महंगी जमीन गंगा एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित होने से सीमांत किसानों की रोजी-रोटी पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
मांग उठाई कि गंगा एक्सप्रेस वे को गंगा नदी के नजदीक से निकाला जाए। इससे गंगा नदी के पास की सैंकड़ों हेक्टेयर सरकारी भूमि मुफ्त में मिल जाएगी। यह एक्सप्रेसवे दारानगर गंज, जहानाबाद से होता हुआ बालावाली, नांगलसोती से हरिद्वार मिला दिया जाए।
कहा कि गंगा के बेहद नजदीक से निकाला गया तो हर साल आने वाली बाढ़ से पीड़ित किसानों राहत मिलेगी। साथ ही कृषि योग्य भूमि के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को भी बल मिलेगा। यदि गंगा एक्सपेसवे गंगा नदी के किनारे नहीं बनता है तो हजारों हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि नष्ट हो जाएगी और हजारों किसान भूमिहीन हो जाएंगे।
गंगा एक्सप्रेस वे का फिर से सर्वे गंगा नदी के समीप से कराने की मांग उठाई। ज्ञापन देने वालों में रालोद किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, ग्राम प्रधान संजय कुमार, ग्राम प्रधान सतपाल सिंह, गुलशेर, ग्राम प्रधान अवनीश कुमार, मुन्नू सिंह, कपिल कुमार, ऋषिपाल सिंह, बृजपाल सिंह, संजीव, उज्जवल आदि शामिल रहे।