बिजनौर। किसान प्राकृतिक तरीके से खेती कर कम लागत में फसलों की उगाई कर सकते हैं। इससे पर्यावरण संरक्षित होगा। खेती एवं मनुष्य का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। इस खेती से स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ उत्पादित होते हैं और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है। इस साल प्राकृतिक खेती के लिए 10 क्लस्टर बनाएं है। इसमें 16 गांवों के किसानों को शामिल किया गया।
नेचुरल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना वर्ष 2025-26 में किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक किया जाएगा। उप कृषि निदेश गिरीश चंद ने बताया कि इस योजना में चयनित 16 ग्रामों में 10 क्लस्टर बनाए गए। इन गांवों में गोष्ठी, चौपाल के माध्यम से प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों को जागरूक किया जा रहा है। गोष्ठी में प्राविधिक सहायक, विषय वस्तु विशेषज्ञ किसानों को विधि के लाभ व कम लागत और उत्पादन का बता रहे हैं। रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से खेती की उर्वरा क्षमता कम पर भी बल दिया जाएगा।
-कृषक सखी, ग्राम प्रधानों का लिया जाएगा सहयोग
उप कृषि निदेशक गिरीश चंद ने बताया कि किसानों जागरूक करने के लिए ग्राम प्रधान, कृषक सखी का सहयोग लिया जाएगा। यह किसानों को जैविक खेती करने, जैविक खाद का अपनी खेती में उपयोग करें को बताएंगे।
प्राकृतिक खेती के लाभ
-प्राकृतिक खेती से पर्यावरण को संरक्षित करने में मदद मिलती है। इससे उत्पादित फसलों की मांग बढ़ रही है।
-कीट प्रबंधन के लिए प्राकृतिक तरीकों का उपयोग किया जाता है, जैसे कि फसल चक्र और जैविक कीटनाशक।
- प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है। जैसे कि कंपोस्ट और वर्मीकंपोस्ट।