झुंडों में खेतों में जा रहे किसान, बच्चों की कड़ी निगरानी
बिजनौर/मंडावर। खौफ का पर्याय बनी एक मादा गुलदार ने दो गांवों के लोगों की पूरी दिनचर्या बदल दी है। मादा गुलदार के डर से रात को सात बजे तक सब घरों में दुबक जाते हैं। खेतों में कोई भी अकेला नहीं जा रहा है। बच्चों को बिल्कुल भी अकेला नहीं छोड़ा जा रहा है। गांव वाले गुलदार के डर से रात में खेतों की ओर जाकर झांक तक नहीं रहे हैं।
26 दिसंबर को मादा गुलदार ने गांव मोहंडिया के जंगल में खेत में काम कर रहे शफीक को मार डाला था। गांव मोहंडिया व नंगला माहेश्वरी का जंगल मिला हुआ है। गुलदार ने जब शुरूआत में शफीक को मारा तो एक दो दिन गांव वाले दहशत में रहे, लेकिन वे सामान्य तौर पर ही जंगल में जाते रहे। न कोई झुंड में जाता था और न ही खेतों में काम करने से पहले कोई शोर आदि करता था। लेकिन मादा गुलदार लगातार मोहंडिया के जंगल में ही दिखाई देती रही। अब गुलदार का खौफ पूरे क्षेद्ध में फैल गया है। गांव मोहंडिया व नंगला महेश्वरी में तो किसानों की दिनचर्या ही बदल गई है। पहले काफी किसान सुबह बहुत सवेरे अंधेरे में ही अकेले खेतों में चले जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। दिन निकलने के बाद ही गांव वाले झुंड में ही खेतों में जा रहे हैं। किसान लाठी-डंडों से लैस रहते हैं। पहले सब एक दूसरे के खेतों में काम करने से पहले शोर आदि करते हैं। खेतों में आग जलाते हैं। अगर कोई मजदूर किसी किसान के खेत में काम करने जाता है तो वह अकेला नहीं जा रहा है। किसान के साथ ही जाता है। खेतों में काम करने वाली महिलाओं की संख्या पहले से कम हो गई है। रात को भी गांव का नजारा बदल जाता है। रात को किसान छह से सात बजे तक घरों में दुबक जाते हैं। पशुशाला में पशुओं की सुरक्षा के लिए भी इंतजाम किए जा रहे हैं। वन विभाग ने जो गाइड लाइन किसानों को बताई थी सब उसका पालन कर रहे हैं। मोहंडिया के प्रधान यशपाल सिंह व नंगला महेश्वरी के प्रधान पुत्र राजीव कुमार के अनुसार गांव वाले पूरी सतर्कता बरत रहे हैं।
बच्चों की कड़ी पहरेदारी
गुलदार के डर से गांव वालों ने छोटे बच्चों का जंगल की ओर जाना बिलकुल बंद ही करा दिया है। बच्चों का पूरा ध्यान रखा जाता है। अगर बच्चे किसी खुली जगह में खेलते हैं तो वहां भी आसपास गांव वाले खड़े रहते हैं। स्कूलों में छुट्टी होने से कई दिन से बच्चे घर पर ही थे। अब शुक्रवार से स्कूल खुल जाएंगे। ऐसे में गांव वालों को बच्चों की और कड़ी निगरानी करनी होगी।
रोशनी की व्यवस्था की
किसान रात में खेतों की ओर नहीं जा रहे हैं। सिंचाई भी दिन में ही कर रहे हैं। जिन किसानों के घरों व पशुशाला में किसी कोने में अंधेरा रहता था, वहां पर बल्ब आदि लगा दिए गए हैं। गांव में अपने घरों के सामने भी सभी ने रोशनी की व्यवस्था की है।