ईरान से निर्यात का प्रतिबंध हटने के बाद बिजनौर जिले में तैयार धान का बीज वेस्ट व ईस्ट के चावल निर्यातकों की पहली पसंद बनकर सामने आया है। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार प्रदेश के कई जिलों के अधिकारियों की डिमांड पर इन प्रजातियों का बीज वहां भेजा गया है।
जिला कृषि अधिकारी प्रमोद सिरोही के अनुसार पूसा बासमती 1509 अर्थात आईईटी 21959 प्रजाति जिले के कृषि फार्म पर तैयार की गई है। इस प्रजाति को पूसा 1301 तथा पूसा 1121 के क्रास से विकसित किया गया है।
यह 120 दिन में पकने वाली अर्द्ध बौनी प्रजाति है। इसकी औसत उपज करीब 42 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। सुगंधित व लंबे आकार का दाना खेत में झड़ता नहीं है। इसी प्रकार पूसा बासमती 06 है। इसकी पकने की अवधि 150 से 155 दिन है।
ईरान में चावल अधिक खाया जाता है। व्यापारियों ने धान का उत्पादन बढ़ाने में रुचि लेनी शुरू कर दी है। अमरोहा, मेरठ, रामपुर, मुरादाबाद के साथ शाहजहांपुर व बनारस के अधिकारियों ने दोनों प्रजातियों के बीजों की डिमांड भेजी है। वहीं जिला कृषि अधिकारी प्रमोद सिरोही का कहना है कि किसानों के लिए यह प्रजाति वरदान साबित होगी।