नूरपुर में नूरपुर विधानसभा उपचुनाव में ईवीएम में हुई खराबी ने मतदान की रफ्तार को रोक दिया। मतदान के लिए बनाए गए 351 बूथों में से 100 से अधिक पर ईवीएम खराब होने की शिकायतें मिलीं। कई बूथों पर एक से दो घंटे तक मतदान बाधित रहा। बूथ संख्या 181 अब्दुल्लापुर दहाना में तीसरी बार मशीन बदले जाने के बाद करीब दो बजे मतदान सुचारु हुआ।
रमजान व भीषण गर्मी होने के बावजूद भी मतदाताओं में भारी उत्साह देखने को मिला। सुबह सात बजे मतदान शुरू होने से पहले ही बूूथों पर मतदाताओं की लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गईं थी। मतदान शुरू होने के कुछ देर बाद ही ईवीएम खराब होनी शुरू हो गईं। 100 से अधिक बूथों पर ईवीएम मशीन खराब होने की शिकायतें मिलीं। कुछ बूथों पर थोड़ी देर बाद ही ईवीएम बदलकर मतदान शुरू करा दिया गया, लेकिन करीब 30 बूथों पर एक से दो घंटे तक मतदान बाधित रहा। ग्राम अब्दुल्लापुर दहाना में बने बूथ संख्या 181 पर सुबह साढ़े सात बजे 32 वोट पड़ने के बाद ईवीएम ने धोखा दे दिया। दूूसरी मशीन 12 बजे के बाद लगाई गई, लेकिन दो वोट पड़ने के बाद वह भी खराब हो गई। बाद में करीब ढाई बजे तीसरी मशीन लगाकर मतदान शुरू कराया गया। यहां पांच बजे के बाद भी मतदाताओं की लंबी लाइनें लगी रहीं। इतनी बड़ी तादात में ईवीएम खराब न होती तो मतदान प्रतिशत और बढ़ सकता था।
वोटिंग के दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध रहे
नुरपुर। मतदान को लेकर सुरक्षा के कड़े प्रबंध रहे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। खालसा इंटर कॉलेज में पुलिस ने मतदाताओं को मोबाइल लेकर नहीं घुसने दिया। मोबाइल लेकर वोट डालने आए मतदाताओं को पुलिस ने गेट के बाहर ही रोक दिया। ऐसे में मोबाइल लेकर आने वाले मतदाता वापस लौट गए और बाद में फोन रखकर वापस आए।
बीएलओ के बूूथ पर न होने से हुई परेशानी
नूरपुर। बूथ के बाहर बीएलओ के नदारद रहने से कई स्थानों पर मतदाताओें को परेशानी हुई। नूरपुर में थाने के सामने पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बने बूथ की बीएलओ मंजूू गायब मिली। यहां मतदाता पर्ची पाने के लिए भटकते रहे। बिना पर्ची के पुलिसकर्मियों ने मतदाताओं को बूथ पर जाने से रोक दिया। बाद में मौकेे पर पहुंचे सपा के जिला सचिव इदरीश काजी ने वहां पहुंचकर हंगामा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएलओ बूथ के अंदर बैठी हैं, जबकि उसे मतदान केंद्र के गेट के बाहर होना चाहिए था।
भाजपा और सपा में बंटे नजर आए दलित
बिजनौर में नूरपुर सीट पर दलित वोट निर्णायक है। दलितों को रिझाने के लिए कई दिनों से भाजपा व सपा के नेता लगे थे। गठबंधन के चलते सपा दलित वोटों को अपना मान रही थी। भाजपा भी दलित वोटों पर अपना दावा कर रही थी। मतदान के दौरान हर किसी की नजर दलित वोटो पर रही। दलितों ने सपा व भाजपा दोनों दलों में किसी को भी निराश नहीं किया। दोनों जगह दलितों के वोट जाते दिखाई दिए। शहर से लेकर देहात तक दलितों का वोट आपस में बंटता नजर आया। मतदान से पहले तक दोनों दलों के नेता दलितों को समझाते रहे पर दलितों ने किसी की नहीं सुनी। दलितों के साथ सैनी वोट आपस में बंटा दिखाई दिया। सैनी भाजपा का वोट माना जाता था। महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव देव मौर्य की राजा के ताजपुर में हुई सपा प्रत्याशी नईमुलहसन के समर्थन में हुई सभा का असर सैनी बिरादरी के लोगों पर दिखाई दिया। सैनी सपा की ओर भी जाते दिखाई दिए। यह देखकर सब हैरत में रहे। राजा के ताजपुर क्षेत्र में कई सैनी बिरादरी के लोग सपा को वोट डालने का दावा करते रहे। जाटों को वोट भी बंटा रहा पर ज्यादातर जाट भाजपा को वोट देते नजर आए।