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सियासत के फंदे में प्रधानों की कुर्सी

Mon, 24 Aug 2015 11:38 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, बिजनौर
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बिजनौर। जिले में ग्राम प्रधानों की कुर्सी सियासत के चक्रवात में फंस गई है। जिले में करीब 50 से भी अधिक ग्राम प्रधान चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। ये वे प्रधान हैं, जिनके खिलाफ ग्रामीणों की शिकायत पर जांच चल रही है। चुनाव आयोग के इस कोड से ग्राम प्रधानों की टेंशन बढ़ गई है।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में घमासान मचा हुआ है। फिलहाल आरक्षण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन बीच-बीच में चुनाव आयोग के नए-नए प्रावधान ग्राम प्रधानों की सांसें फुला रहे हैं। जिला पंचायत विभाग के अनुसार त्रिस्तरीय पंचायत में ऐसे जनप्रतिनिधि एवं मतदाता चुनाव लड़ने के लिए योग्य नहीं होंगे, जिन पर ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत या जिला पंचायत के साथ-साथ किसी भी तरह का टैक्स बकाया है।

इसके अलावा जांच के घेरे में आने वाले ग्राम प्रधान भी चुनाव लड़ने के लिए योग्य नहीं होंगे। जिले में इस तरह के करीब पचास से भी अधिक ग्राम प्रधान है, जिनकी जांच चल रही है या फिर वे निलंबित भी हो चुकी है। फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों में विपक्षी खेमे के व्यक्ति भी चुनाव आयोग के कोड को लेकर पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं।
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ग्राम प्रधानों के खिलाफ पहले जहां प्रतिमाह करीब आठ से दस शिकायतें आ रही थीं, वहीं अब इनकी संख्या पंद्रह तक पहुंच गई है। पिछले बीस दिनों में ही बारह ग्राम प्रधानों के खिलाफ शिकायत आ चुकी है। शिकायतों पर जांच की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

ग्रामीण आरटीआई के तहत सूचना लेने के बाद प्रधान की पुख्ता शिकायत जिला पंचायत राज विभाग एवं डीएम से कर रहे हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी मनीष कुमार के अनुसार जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत या ग्राम पंचायत के बकाएदार व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। अगर किसी प्रधान के खिलाफ जांच चल रही है और वह जांच में दोषी पाया जाता है तो वह भी चुनाव नहीं लड़ पाएगा।

सज गए शहरों से सटे गांव
शहरों से सटी कॉलोनियों में ग्राम प्रधान का चुनाव निकाय की तर्ज पर लड़ने की तैयारी चल रही है। आवास विकास कॉलोनी, इस्लामपुरदास, तीमपुर, रशीदपुर गढ़ी से जुड़ी कॉलोनी, बकली, बख्शीवाला, आमदपुर पंचायत से जुड़ी कॉलोनियों में चुनाव की दस्तक साफ नजर आ रही है।

ज्यादातर कालोनियां होर्डिंग्स एवं पोस्टर से अटी पड़ी है। जगह-जगह बैनर लगे हुए हैं। शहर से सटे गांवों में प्रधान पद के चुनाव में जिले के बड़े-बड़े नेता रुचि ले रहे हैं। आवास विकास में तो कई दलों के बड़े नेता रहते हैं।
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