बिजनौर में गंगा बैराज के तटबंध के कटान को रोकने के लिए मिट्टी से भरे कट्टे लगाते मजदूर। सवाद
बिजनौर। तटबंध को रोके पड़े हैं, किसी तरह से ये पानी निकल जाए... एक अफसर के मुंह से ये बोल गंगा में उफान आता देख निकले। अब देहरादून में बादल फटने और पहाड़ पर हो रही बारिश से गंगा में उफान है। ऐसे में कटान के चलते कमजोर हो चुके बिजनौर बैराज के तटबंध को बचाए रखने की जद्दोजहद चल रही है।
मंगलवार को भी सुबह से लेकर शाम तक तटबंध पर काम चलता रहा। नए और पुराने तटबंध को कटान से बचाने के लिए मिट्टी के कट्टे लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा पेड़ आदि डालकर भी गंगा की धारा से बचाने का काम किया जाता रहा। यह जतन बीते नौ दिनों से किए जा रहे हैं। इसके बाद भी करीब 800 मीटर की लंबाई में तटबंध पूरी तरह से खत्म हो चुका है। हालांकि यह भी गनीमत रही कि तटबंध के पूरा टूट जाने से पहले ही इसके पीछे नया तटबंध तैयार कर लिया गया था। अब गंगा की धारा नए तटबंध पर भी सीधे टक्कर मार रही है। नए तटबंध के साथ-साथ दूसरी जगह पर पुराने तटबंध को बचाने की जद्दोजहद की जा रही है। पहाड़ की बारिश से फूल रहे अफसरों के हाथ पांव : एक तो पहले से ही तटबंध खतरे में है, उधर पहाड़ों पर हो रही बारिश से अफसरों में बेचैनी है।
बिजनौर में गंगा बैराज के तटबंध के कटान को रोकने के लिए मिट्टी से भरे कट्टे लगाते मजदूर। सवाद