- एक शताब्दी से रावण, मेघनाद, कुंभकरण की बुराई का अंत करा रहा है मुस्लिम परिवार
- उत्तराखंड में भी लोकप्रिय हैं मुस्लिम परिवार के बनाए पुतले
संवाद न्यूज एजेंसी
नजीबाबाद। दशहरा पर्व पर मुस्लिम परिवार के बनाए रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले नगर और उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में बुराई के रूप में आज जलाए जाएंगे। शहजाद का पुश्तैनी परिवार एक शताब्दी से पुतले बना रहा है।
दशहरा पर्व आने से दो माह पूर्व नगर का मुस्लिम परिवार पुतले बनाने में जुट जाता है। मोहल्ला जाब्तागंज निवासी 60 वर्षीय शहजाद द्वारा रावण, मेघनाद, कुंभकरण के पुतले बनाने के पुश्तैनी काम को बखूबी अंजाम दिया जा रहा है। पिता मो.शफात से उन्हें विरासत में पुतले बनाने का काम मिला है।
दो माह से शहजाद ने अपने पुत्रों उमरदराज, अयाज, सोनू और ताबिश के सहयोग से उत्तराखंड के कोटद्वार, दुगड्डा, कलालघाटी, लैंसडौन के लिए पुतले तैयार किए हैं। नगर के रामलीला ग्राउंड, गांव सिकंदरपुर बसी, गुनियापुर, नहटौर, धामपुर के लिए भी शहजाद के परिवार ने रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले तैयार किए हैं।
मजदूर-पेशा शहजाद और उनके पुत्र उमरदराज का कहना है कि उन्हें पुतले बनाने में आर्थिक मदद मिलती है। साथ ही हिंदू धर्म के लिए बुराई के रूप में जलाने के लिए पुतले बनाकर परिवार को दिली सुकून मिलता है। महंगाई के दौर में पुतले बनाने में समय अधिक लगने और पैसा कम मिलने से शहजाद का परिवार चिंतित है।
शहजाद का कहना है कि इस साल उन्होंने जनपद और उत्तराखंड के करीब 20 क्षेत्रों के लिए रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले तैयार किए हैं।