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Crime news: दिन में शहद बेचते और रात को खंगाल लेते थे घर, कुत्ते न भौंके इसके लिए करते थे ये काम

Mon, 11 Jul 2022 05:14 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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- फोटो : अमर उजाला
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किस घर में चोरी करनी है, घर कैसे दाखिल हो सकेंगे। यह सब जानने के लिए चोरों ने बेहद शातिराना तरीका अपनाया। जी हां, पुलिस ने ऐसे चोरों को पकड़ा है जोकि दिन में शहद बेचने के बहाने रेकी करते और रात को घर खंगाल लेते थे। खानबदोश जाति के यह चोर जगह-जगह डेरा डालकर चोरी को अंजाम देते रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने दो चोरों को पकड़कर दो घरों में हुई चोरी का खुलासा कर दिया है। करीब डेढ़ लाख रुपये का माल बरामद हुआ है।
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रविवार को एएसपी सिटी डॉ. प्रवीन रंजन सिंह और सीओ सिटी अनिल कुमार सिंह ने प्रेसवार्ता कर चोरी का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि सुशील पुत्र नरदेव सिंह निवासी स्योहारा फैजुल्लापुर स्योहारा स्टेशन के पास और खेवेंद्र पुत्र वीर सिंह निवासी इस्लामनगर नूरपुर को गिरफ्तार किया गया है। जबकि अमरोहा के गांव चुचैला के रहने वाले इनके तीन साथी फरार हैं। पकड़े गए आरोपियों के पास से पीली धातु के एक जोड़ी कुंडल, दो नथ, एक जोड़ी बाली, दो अंगूठी आदि समेत डेढ़ लाख रुपये के आभूषण बरामद किए गए हैं।
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नकद 32 हजार रुपये के साथ साथ दो तमंचे भी बरामद किए गए हैं। इन्होंने मंडावर थाना क्षेत्र के गांव दौलतपुर में संजीव कुमार और नवनीत कुमार के घर में चोरी की थी। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि जिले में जगह जगह डेरा डाल लेते हैं और शहद बेचने के बहाने ऐसे घरों की पहचान करते हैं, जहां चोरी करनी होती है। बीस दिन पहले चंदक में आकर डेरा डाला और दौलतपुर के दो घरों में चोरी की थी। गिरफ्तार करने वाली टीम में थानाध्यक्ष संजय कुमार, एसआई श्रीपाल सिंह, एसआई पुत्तुलाल वर्मा आदि शामिल रहे।

हाथ में रखते थे डंडा और ईंट
खानबदोश जाति के ये चोर रात में चोरी करने के लिए जाते हुए हाथ में डंडा और ईंट का टुकड़ा रखते थे। जिससे घिर जाने पर डंडा मारकर फरार हुआ जा सके। चोरी के वक्त ये असलहा नहीं रखते हैं।

कुत्ते भौंके नहीं, इसके लिए डालते हैं मांस
थानाध्यक्ष संजय कुमार ने बताया कि अक्सर कुत्तों के भौंकने से ही यह मालूम पड़ जाता है कि गांव में कोई अजनबी दाखिल हुआ है लेकिन इन शातिर चोरों ने कुत्तों को भौंकने से रोकने और दुम हिलाने के लिए पर मांस डालने का तरीका अपनाया। मांस मिलते ही कुत्ते इन्हें देखकर भौंकने की बजाए दुम हिलाने लगते थे। कहीं कहीं ये रोटी डालकर भी कुत्तों का भौंकने से रोक देते थे।
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