बिजनौर के धामपुर में नोटबंदी के चलते इस बार गन्ना क्रेशरों का दम निकल गया है। 120 गन्ना क्रेशरों में से केवल इस बार 16 गन्ना क्रेशर चले। इनमें दो क्रेशर बीच में ही बंद हो गए। गन्ना क्रेेशर स्वामियों ने कहा कि न तो किसानों का नगद में गन्ना क्रय कर पा रहे हैं और न ही लेबरों को उनका भुगतान कर पा रहे हैं।
धामपुर सहायक चीनी आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में जिले की दो तहसील चांदपुर और धामपुर आती है। इन दोनों तहसीलों में वर्तमान में गन्ना विभाग की ओर से 120 गन्ना क्रेशरों के लाइसेंस है। विडंबना है कि इन गन्ना क्रेशरों में से इस बार केवल 16 गन्ना क्रेशर ही चल सके थे। इन क्रेशरों में से नहटौर और गांव भवानपुर कलिया के क्रेशर बंद हो गए। गन्ना क्रेशर स्वामी उमेश, विनीत कुमार , अजीत सिंह, नोभहार सिंह फीना ने बताया कि इस बार गन्ना क्रेशरों को चला पाना उनके लिए भारी पड़ रहा है। गन्ना खरीदने व लेबर को उनकी मजदूरी बांटने के लिए पर्याप्त नकदी नहीं है। किसान और लेबर को नकद पैसा चाहिए। क्रेशर स्वामी बताते हैं कि वर्ष 1970 से लेकर 1980 तक क्षेत्र में करीब 1500 गन्ना क्रेशर चीनी मिलों की तर्ज पर चीनी, नॉन सल्फर, व सल्फर का उत्पादन करते थे। आज की दौर में इनकी संख्या केवल 14 पर पहुंच गई है। इनमें से भी कोई ऐसी यूनिट नहीं है, जिसमें चीनी का उत्पादन हो रहा है। केवल यूनिट खांड़ बना रही है बाकी गुड़ का उत्पादन कर रही हैं। गन्ना क्रेशरों पर नोटबंदी का बुरा असर पड़ा है। सरकार को गन्ना क्रेशरों के अस्तित्व को बचाने के लिए संरक्षण देना चाहिए।