संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन की ओर शनिवार की शाम संभागीय नाट्य समारोह का आयोजन हुआ। तीसरे दिन रामधारी सिंह दिनकर के महाकाव्य रश्मिरथी का नाट्य मंचन हुआ। सांस्कृतिक संगम देवरिया के कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
मंचन में नाटक की कथावस्तु कर्ण के जन्म से प्रारंभ होती है। वह सूर्यपुत्र होने के बावजूद कुंती द्वारा जन्म के तुरंत बाद नदी में बहा दिया जाता है। अधिरथ और राधा नामक सारथी दंपति उसे पालते हैं। कर्ण क्षत्रिय योद्धा बनने की इच्छा रखते हुए गुरु द्रोणाचार्य के पास जाता है। राजपुत्र न होने के कारण उसे शिक्षा नहीं मिलती है। तब वह परशुराम जी का शिष्य बनकर अस्त्र-शस्त्र विद्या सीखता है।
द्रौपदी के स्वयंवर में भी कर्ण को राजपुत्र न होने के कारण भाग लेने से रोका जाता है। इस अपमान से दुखी होकर वह क्रोध में भर जाता है। महाभारत के युद्ध से पूर्व भगवान कृष्ण कर्ण को समझाने आते हैं। कुरुक्षेत्र युद्ध में कर्ण और अर्जुन के बीच भयंकर युद्ध होता है। युद्ध के दौरान कर्ण का रथ धरती में धंस जाता है।
अर्जुन श्रीकृष्ण के आदेश पर कर्ण का वध कर देता है। मानवेन्द्र त्रिपाठी, राज मौर्य,रवींद्र रंगधर,आकांक्षा विक्ट्री, प्रमोद कुमार सिंह, उपहार मिश्रा,नवनीत जयसवाल,चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव, अजय ठाकुर आदि मुख्य कलाकार रहे।
नाटक का शुभारंभ सुभाष बाल्मीकि, अवर अभियंता यशवंत सिंह, भूषण शर्मा, शैलजा, प्रोफेसर. शशिप्रभा रघुवंशी, सुमन सिंह, डॉ. अनिल शर्मा अनिल शर्मा ने नटेश्वर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन किया कार्यक्रम में राजवीर सिंह, शमशाद अंसारी, साहू, कृपाल सिंह, पंकज चौहान, का सहयोग रहा। संचालन डॉ. राजेंद्र चौधरी ने किया।